ढाका
शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद भारत का पड़ोसी बांग्लादेश हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के लिए नर्क बन गया है। भारत की कड़ी आपत्तियों के बावजूद भी बांग्लादेश के हिंदुओं को कोई राहत नहीं मिल रही है। दुर्गा पूजा मनाने के खिलाफ धमकी भरे पत्रों से लेकर हिंदू अधिकारियों को जबरन रिटायर करने तक बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का दमन जारी है। इस बीच बांग्लादेश से एक वीडियो आया है, जो दिखाता है कि यहां कट्टरपंथी किस तरह से हावी हो गए हैं। इस वीडियो में लोगों की एक भीड़ देखी जा सकती है जो कथित तौर पर बंगाली में नारा लगा रहे हैं कि दुर्गा पूजा नहीं होने देंगे। एनबीटी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक इंटेलिजेंस से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि वह अल्पसंख्यकों पर हो रहे उत्पीड़न पर नजर रख रहे हैं और बांग्लादेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में हैं। इस बयान के मुताबिक भारतीय मिशन के अधिकारी इन घटनाओं पर नजर रख रहे हैं। ये मांगें अनुचित हैं और शेख हसीना के जाने के बाद मोहम्मद यूनुस की सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने आगे कहा, ‘यह हमारे लिए चिंता का विषय है और हम इस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाएंगे।’
दुर्गा पूजा मनाने पर धमकी
बांग्लादेश में हिंदुओं को गुमनाम पत्र मिले हैं, जिसमें उन्हें धमकी दी गई है कि बिना 5 लाख टका दिए उन्हें दुर्गा पूजा नहीं मनाने दिया जाएगा। अलग-अलग पूजा उत्सव समितियों के नेताओं को भेजे गए पत्रों में यह भी कहा गया है कि अगर शर्त नहीं मानी गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। कुछ समितियों ने हिंसा के डर से कार्यक्रम रद्द कर दिया है। जबकि कुछ पुलिस के पास गए हैं। पत्र में यह भी धमकी दी गई है कि अगर मीडिया को रिपोर्ट की तो टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएंगे। ढाका में प्रदर्शन करके दुर्गापूजा रोकने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि ईद के दौरान जिस जमीन पर वह नमाज पढ़ते हैं अगर हिंदुओं ने उस पर पूजा की तो जमीन ‘अपवित्र’ हो जाएगी।
हिंदुओं के खिलाफ अभियान
बांग्लागेश में रविवार को एक 74 वर्षीय हिंदू स्वतंत्रता सेनानी खगेंद्र नाथ प्रमाणिक पर उनके घर पर धारदार हथियार से हमला किया गया। वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है, जिनका अभी तक इलाके में कोई दुश्मन नहीं था। बांग्लादेश में 1997 बैच के सिविल सेवा टॉपर और बांग्लादेश पुलिस के अधिकारी को जबरन रिटार कर दिया गया। जमात और बीएनपी वाली सत्ता में उन्हें तीन बार प्रमोशन नहीं दिया गया।
