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भारत झूठ बोल रहा… सिंधु जल समझौते पर आया न्यूट्रल एक्सपर्ट का बयान तो बौखलाए पूर्व पाकिस्‍तानी राजनयिक, निकाली भड़ास

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इस्लामाबाद

भारत-पाकिस्तान के जल सिंधु समझौते पर विश्व बैंक की ओर से नियुक्त न्यूट्रल एक्सपर्ट तटस्थ विशेषज्ञ ने अहम बयान दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट ने किशनगंगा और रतले जलविद्युत प्रोजेक्ट पर विवाद सुलझाने के लिए भारतीय रुख का समर्थन किया है। भारत इस मामले को सिंधु जल संधि (IWT) के तहत तटस्थ विशेषज्ञ के जरिए सुलझाने का पक्षधर है, जबकि पाकिस्तान इसे हेग मध्यस्थता न्यायालय में ले जाना चाहता है। भारत ने न्यूट्रल एक्सपर्ट से मिले समर्थन का स्वागत किया है। दूसरी ओर भारत में उच्चायुक्त रह चुके पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित का कहना है कि इस मामले पर भारत झूठ बोल रहा है।

अब्दुल बासित ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, ‘भारत के किशनगंगा और रतले में जो प्रोजक्ट हैं, उस पर पाकिस्तान ने सात मुद्दे आपत्ति उठाई हैं। न्यूट्रल एक्सपर्ट ने कहा है कि वह इन मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों को सुनेगा। एक्सपर्ट ने सिर्फ इतना कहा है कि ये उनके अधिकार क्षेत्र में है, वह इसे सुन सकते हैं। इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि ये जीत गया और वो हार गया। भारतीय मीडिया में इसे अपनी जीत की तरह पेश कर रहा हाै, जो समझ से परे है।’

भारत इसे अपनी जीत ना समझे: बासित
बासित ने आगे कहा, ‘पाकिस्तान तो यही चाहता है कि संधि के हिसाब से उसे पानी उसे मिलता रहे। पाकिस्तान सिर्फ इतना चाहता है कि उसका हक ना मारा जाए। हालांकि मुझे ये जानकर खुशी हुई कि भारत के विदेश मंत्रालय ने जल संधि का सम्मान करने की बात कही है। ये अच्छी बात है क्योंकि भारत-पाक के बीच ये बहुत अहम समझौता है। कई वर्षों की बातचीत के बाद ये डील हुई थी और भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धों के बावजूद ये संधि चलती रही है।

बासित ने कहा कि भारत ने बीते कुछ साल में इस संधि पर सवाल उठाए हैं। भारत ने इस संधि में बदलाव की कोशिश भी की है। भारत को समझना चाहिए कि इसमें बदलाव आसान नहीं है। इस संधि में एक पक्ष बदलाव नहीं कर सकता है। यहां तक कि इस संधि से एक पक्ष खुद से निकल भी नहीं सकता है। ऐसे में हमें वर्ल्ड बैंक के एकसपर्ट के फैसला का इंतजार करना होगा। एक्सपर्ट के बाद ये मामला हेग की अदालत में भी जा सकता है। इसे किसी की जीत या हार कहना जल्दबाजी है।

क्या है विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे के लिए 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के तहत तीन पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत को दिया गया। तीन पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया।

ये संधि भारत को पश्चिमी नदियों पर कुछ सीमित सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति देती है। यही कारण है कि किशनगंगा और रतले परियोजनाओं को लेकर विवाद चल रहा है। भारत का कहना है कि वह संधि के प्रावधानों के अनुसार इन परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि ये परियोजनाएं उसके पानी के हिस्से को प्रभावित करेंगी।

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