काहिरा
इजरायल और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच भीषण जंग का दौर शुरू हो गया है। हूती विद्रोहियों के लगातार मिसाइल हमले के बाद इजरायल की सेना ने 100 फाइटर जेट के साथ जोरदार जवाबी हमला करके यमन में भारी तबाही मचाई है। इजरायल और हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई अब अफ्रीकी मुस्लिम देश मिस्र को भारी पड़ रहा है। मिस्र की स्वेज नहर से होने वाली कमाई 60 फीसदी गिर गई है। इससे मिस्र को 7 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। वह भी तब जब मिस्र गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि मिस्र में इसी तरह से आर्थिक संकट बना रहा तो वहां सीरिया जैसा हाल हो सकता है। कई साल से सत्ता में बने हुए राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी की सरकार गिर सकती है।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल और हूती हमले की वजह से दुनियाभर के व्यापारिक जहाजों ने स्वेज नहर से किनारा कर लिया है जिससे साल 2024 में मिस्र की कमाई में 60 फीसदी की भारी भरकम गिरावट आई है। स्वेज नहर प्राधिकरण के मुताबिक इससे 7 अरब डॉलर का भारी-भरकम घाटा हुआ है। गाजा युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया का 12 फीसदी व्यापार स्वेज नहर के रास्ते होता था। यह नहर मिस्र की अर्थव्यवस्था के लिए लाइफलाइन है। हूती लगातार लाल सागर में इजरायल और अमेरिका के व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं।
हूतियों का वार, संकट में सीसी सरकार
हूती भारतीय जहाजों को भी निशाना बना चुके हैं। नवंबर 2023 से लेकर अब तक हूती 100 से ज्यादा हमले लाल सागर से गुजर रहे जहाजों पर कर चुके हैं। हूतियों ने ऐलान किया है कि जब तक इजरायल गाजा पर हमले बंद नहीं करता है, तब तक वे लाल सागर में हमले बंद नहीं करेंगे। इसी वजह से जहाजों से जुड़ी हुई कंपनियों को दक्षिण अफ्रीका का चक्कर लगाते हुए जाना पड़ रहा है जो काफी लंबा और समय लेने वाला है। अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल ने हूतियों पर कई हमले किए हैं लेकिन इसके बाद भी ईरान के समर्थन से हूती विद्रोही हमले कर रहे हैं।
हूतियों के इस ऐक्शन से मिस्र का संकट बढ़ गया है। वह भी तब जब मिस्र की अर्थव्यवस्था कंगाली के दौर से गुजर रही है। मिस्र के राष्ट्रपति भारत से लेकर सऊदी तक से मदद की गुहार लगा चुके हैं। यही नहीं मिस्र को अपने शहरों को बेचना पड़ा है। मिस्र में महंगाई अपने चरम पर है जिससे जनता बेहाल है। मिस्र की मुद्रा रसातल में चल रही है। कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जिस तरह के हालात चल रहे हैं, मिस्र का भी सीरिया वाला हाल हो सकता है और राष्ट्रपति सीसी को सत्ता से जाना पड़ सकता है।
अल सीसी को सताया सीरिया जैसे हालात का डर
अल सीसी ने अभी तक सीरिया से असद के जाने पर कोई सीधे तौर पर बयान नहीं दिया है लेकिन उनके हालिया बयानों से लग रहा है कि वह तनाव में हैं। अल सीसी ने कहा है, ‘मेरे हाथ किसी के खून से नहीं रंगे हैं और न ही मैंने किसी का पैसा चोरी किया है।’अल सीसी सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता में आए थे। उनके कार्यकाल में करीब 65 हजार राजनीतिक कैदी जेल में बंद हैं।
