इस्लामाबाद
कंगाली की मार झेल रहे पाकिस्तान की तरफ एक बड़ा राजनीतिक संकट बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस संकट के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भतीजी मरियम नवाज हैं। मरियम के बागी तेवर आने वाले समय में संकटग्रस्त मुल्क में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मरियम नवाज अपने चाचा को कुर्सी से हटाकर खुद मुल्क की प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं। उन्होंने गठबंधन सरकार की ओर से पेश किए गए ‘मिनी बजट’ के बाद ‘अलोकप्रिय फैसलों’ और सरकार से खुद को अलग कर लिया है।
पिछले हफ्ते शहबाज सरकार ने आईएमएफ से कर्ज हासिल करने के लिए एक मिनी बजट पेश किया था। इसमें जनता पर और अधिक टैक्स लगाया गया था और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि की गई थी। सरकार के फैसले के खिलाफ मरियम ने शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि नौ दलों की यह गठबंधन सरकार हमारी सरकार नहीं है। हमारी सरकार नवाज शरीफ की होगी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मरियम नवाज के पिता नवाज शरीफ फिलहाल लंदन में हैं।
‘बाजवा के जाने के बाद मिली असली सत्ता’
शहबाज सरकार की ओर से पाकिस्तानी अवाम पर थोपे गए 170 अरब रुपए के टैक्स के बाद लोग गुस्से में हैं। मरियम के इस बयान को जनता की नाराजगी दूर करने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल नवंबर में पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रि.) कमर जावेद बाजवा के रिटायरमेंट के बाद पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को असली सत्ता मिली। बहावलपुर में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि नवंबर से पहले पाकिस्तान में सरकार ‘कोई और’ चला रहा था।
मरियम के पति जुटा रहे समर्थन?
पाकिस्तान में आगामी अक्टूबर में प्रधानमंत्री के चुनाव होंगे। उससे पहले मरियम नवाज के विरोधी सुर यह संकेत दे रहे हैं कि वह चाचा की जगह पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं। कुछ खबरों की मानें तो मरियम नवाज के पति रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद सफदर पार्टी के भीतर उनके लिए समर्थन जुटा रहे हैं। आईएमएफ को खुश करने की खातिर जनता पर महंगाई की चाबुक चलाने के लिए ‘मिनी बजट’ पेश करना अब शहबाज शरीफ पर ही भारी पड़ रहा है। ना सिर्फ जनता बल्कि उनकी पार्टी के नेता भी इस फैसले के विरोध में हैं।
चुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है फैसलों का असर
पीएमएल-एन के नेता शाहिद खाकान अब्बासी ने सरकार के फैसलों के खिलाफ इस्तीफे की पेशकश की है। संकट के समय में शहबाज सरकार की ओर से लिए गए फैसलों का असर चुनाव के नतीजों में उनकी पार्टी पर भी पड़ सकता है। यह भी संभव है कि इसी वजह से मरियम नवाज ने खुद को सरकार से अलग कर लिया है। अब वह जनता के सामने अगले प्रधानमंत्री के रूप में शहबाज के बजाय अपने पिता नवाज शरीफ को प्रोजेक्ट कर रही हैं।
सेना ले सकती है बड़ा फैसला
पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास बहुत पुराना है। साल 1947 में अस्तित्व में आने के बाद से पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। पाकिस्तानी सेना ने लंबे समय तक देश पर शासन किया है। यह भी संभव है कि अगर पाकिस्तान में आर्थिक संकट और अधिक गहराता है तो सेना आगे आकर बड़ा फैसला ले सकती है।
