ओटावा
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनकी सरकार को लेकर किए गए एक सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि जस्टिन ट्रूडो मुश्किल में हैं। सर्वे के अनुसार, दो-तिहाई से ज्यादा कनाडाई चाहते हैं कि जस्टिन ट्रूडो इस्तीफा दे दें। लिबरल पार्टी के अंदर भी विद्रोह हो रहा है। उनकी पूर्व वित्त मंत्री और डिप्टी पीएम क्रिस्टिया फ्रीलैंड के इस्तीफे के बाद, पार्टी के एक तिहाई सांसदों ने भी ट्रूडो के इस्तीफे की मांग की है। यह सब अक्टूबर 2025 में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले हो रहा है। ट्रूडो की लोकप्रियता लगातार घट रही है और लीबरल पार्टी को चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ सकता है।
लेगर की ओर से किए गए एक सर्वे में 69 फीसद कनाडाई लोगों ने कहा कि ट्रूडो को इस्तीफा दे देना चाहिए। नेशनल पोस्ट के अनुसार, यह संख्या बहुत बड़ी है। सिर्फ ट्रूडो ही नहीं, बल्कि पूरी संघीय सरकार से लोग नाखुश हैं। 72 फीसद कनाडाई लोगों ने कहा कि वे सरकार से असंतुष्ट हैं। ट्रूडो पर पार्टी के अंदर और बाहर से दबाव बढ़ रहा है। कहा जा रहा है कि इस स्थिति से बचने के लिए ट्रूडो समय से पहले चुनाव करा सकते हैं।
जस्टिन ट्रूडो को लेकर विश्लेषकों का क्या है कहना?
ट्रूडो की लिबरल पार्टी इस समय कंजर्वेटिव पार्टी से काफी पीछे है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रूडो पार्टी के लिए एक बोझ बन गए हैं। अगर वो नेतृत्व करते रहे तो पार्टी की स्थिति और खराब हो सकती है। सीबीसी न्यूज के पोल ट्रैकर के अनुसार, कंजर्वेटिव पार्टी को 44 फीसद लोगों का समर्थन प्राप्त है, जबकि लिबरल्स को केवल 20.9 फीसद लोगों का समर्थन है।
लिबरल्स का समर्थन इतना कम हो गया है कि वे विपक्ष का नेता पद भी खो सकते हैं। जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) को 19 फीसद लोगों का समर्थन प्राप्त है, जो लिबरल्स के समर्थन से बहुत ज्यादा पीछे नहीं है। अगर चुनाव के नतीजे पोल के अनुसार रहे, तो ब्लॉक क्यूबेकॉइस या एनडीपी विपक्ष का नेतृत्व कर सकती है।
कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में किसके पास कितनी सीटें?
कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में कुल 337 सीटें हैं। इस समय लिबरल्स के पास 153, कंजर्वेटिव के पास 120, एनडीपी के पास 25 और ब्लॉक क्यूबेकॉइस के पास 33 सीटें हैं। ट्रूडो की सरकार अल्पमत में है। सितंबर में एनडीपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिससे ट्रूडो और लिबरल्स संकट में आ गए। यह स्थिति ट्रूडो के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इस सर्वे के नतीजे ट्रूडो के लिए चिंताजनक हैं। पार्टी के अंदर विद्रोह और गिरती लोकप्रियता उनके लिए बड़ी समस्याएं हैं। क्या ट्रूडो इस संकट से उबर पाएंगे? क्या वो समय से पहले चुनाव कराएंगे? क्या लिबरल्स विपक्ष का नेता पद भी खो देंगे? ये सभी सवाल अब उठ रहे हैं। आने वाले समय में कनाडा की राजनीति में क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
