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‘हम फंस गए…’, कनाडा में स्टूडेंट्स को नहीं मिल रहा खाना, दाने-दाने को तरसे

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कनाडा में बढ़ती महंगी की मार विदेशी छात्रों पर भी पड़ रही है। इसकी वजह ये है कि देश में खाने की चीजें मुहैया कराने वाले फूड बैंक ने फैसला किया है कि वे सिर्फ कनाडाई नागरिकों और परमानेंट रेजिडेंट की ही मदद करेंगे। इससे हजारों विदेशी छात्र और हाल ही में ग्रेजुएट हुए लोगों के लिए खाने का इंतजाम करना मुश्किल हो चुका है। कनाडा के फूड बैंक खाने की कमी से जूझ रहे लोगों को भोजन मुहैया कराते हैं। विदेशी छात्र भी खाने के लिए फूड बैंक पर निर्भर रहते थे।

बहुत से विदेशी छात्रों के लिए फूड बैंक सिर्फ खाना ही नहीं मुहैया कराते थे, बल्कि ये उनके लिए एक जरूरी चीज थे। छात्रों का कहना है कि फूड बैंक की वजह से हर महीने उनके 300 से 400 कनाडाई डॉलर बच जाते थे। वैंकुवर में रहने वाले और एक रेस्तरां में काम करने वाले हैदराबाद के 27 साल के एक छात्र ने बताया, “ट्यूशन फीस, किराया और यूटिलिटी भरने वाले लोगों के लिए ये रकम बहुत ज्यादा होती है। खासतौर पर तब, जब यहां रहने-खाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है।”

कनाडा में खाने की चीजें काफी ज्यादा महंगी
सर्रे में बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर कर रहे एक अन्य छात्र ने बताया, “मैं यहां कुछ सेविंग्स के साथ आया था, लेकिन मैंने खाने की चीजें इतनी महंगी होने की उम्मीद नहीं की थी।” उसने कहा, “फूड बैंक ने मेरा बजट सुधारने में काफी मदद की। अब ये ऑप्शन भी खत्म हो चुका है और मैंने खाना खाना छोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि काम चल पाए।” छात्रों के लिए फूड बैंक एक ऐसा सोर्स थे, जहां उन्हें आसानी से खाना मिल जाता था। बहुत से भारतीय छात्र तो इन फूड बैंक्स के भरोसे ही रहते थे।

फूड बैंक्स क्यों नहीं दे रहे खाना?
हाल के हफ्तों में कई सारे फूड बैंक के नेटवर्क्स ने फैसला किया कि वे विदेशी छात्रों को खाना नहीं देंगे। इससे विदेशी छात्र काफी ज्यादा हैरान-परेशान हैं। कुछ फूड बैंक्स का कहना है कि विदेशी छात्रों को वीजा के लिए अपनी आर्थिक स्थिति दिखानी होती है। इसलिए उन्हें मदद नहीं दी जा सकती। लेकिन स्टूडेंट्स इससे नाराज हैं। उनका कहना है कि कागज पर जो दिखाया जाता है, वो असलियत से अलग होता है।

टोरंटो में एक कॉफी शॉप में काम करने वाले हैदराबाद के एक ग्रेजुएट स्टूडेंट ने कहा, “मैंने यहां पढ़ने के लिए लोन लिया है। उस लोन में खाने की चीजों की महंगाई या पार्ट-टाइम जॉब मिलने में हो रही मुश्किलों को शामिल नहीं किया गया है। हम चैरिटी नहीं मांग रहे हैं, हम सिर्फ सर्वाइव करने की कोशिश कर रहे हैं।”

पार्ट-टाइम जॉब्स मिलना कठिन
विदेशी छात्रों को पढ़ाई के साथ हर हफ्ते 24 घंटे तक काम करने की इजाजत होती है। लेकिन बहुत से छात्रों को मुश्किल से ही पार्ट-टाइम जॉब मिल रही है। पहले रिटेल स्टोर्स और कैफे स्टूडेंट्स के लिए कमाई का अच्छा जरिया थे, लेकिन अब वो कम लोगों को नौकरी दे रहे हैं और कम घंटे काम करवा रहे हैं। वहीं, खाने के बिल लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

टोरंटो के छात्र ने बताया, “पहले दो शिफ्ट करके बेसिक खर्च निकालना मुमकिन था। अब वो जॉब भी लोकल लोगों को मिल रही हैं, जो खुद भी मुश्किल में हैं। हम फंस गए हैं- न फूड बैंक, न जॉब, न कोई मदद।”

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