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Monday, April 13, 2026
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क्या विदेश में पढ़ने से भारतीयों का हो रहा मोहभंग? चौंकाने वाला आंकड़ा आया सामने

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पिछले एक दशक में भारतीय छात्रों के बीच विदेश में पढ़ाई काफी ज्यादा पॉपुलर हुई है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जैसे देशों में स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा पढ़ाई के लिए जाते रहे हैं। हालांकि, सरकार का डाटा कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहा है। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के डाटा के मुताबिक, 2024 में विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में सबसे कम संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए पहुंचे हैं।

ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के डाटा से पता चलता है कि 2024 में इन तीन देशों में जाने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में 27% की गिरावट हुई है। इसकी मुख्य वजह कड़े वीजा नियम, पढ़ाई का बढ़ता खर्च, वीजा रिजेक्शन रेट बढ़ना और राजनयिक टेंशन है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि कुछ ऐसे भी देश हैं, जहां भारतीय छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें रूस, जर्मनी और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। यहां पढ़ने जाने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स मेडिकल एजुकेशन हासिल करने जाते हैं।

विदेश में छात्रों की कितनी संख्या कम हुई?
आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में पढ़ने जाने छात्रों की संख्या में एक साल के भीतर 1,64,370 की गिरावट देखने को मिली है। अकेले कनाडा में 41% भारतीय छात्र कम हुए हैं। 2023 में स्टूडेंट्स की संख्या 2,33,532 थी, जो 2024 में कम होकर 1,37,608 हो गई। अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या 2023 में 2,34,473 थी, जो 2024 में 13% घटकर 2,04,058 हो गई। ब्रिटेन में छात्रों की संख्या में 27% की गिरावट हुई है। 2023 में यहां 1,36,921 छात्र पढ़ाई कर रहे थे, जो 2024 में घटकर 98,890 हो गई।

ऑस्ट्रेलिया में भी पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या तेजी से कम हुई है। यहां 2023 में 78,093 छात्र पढ़ाई कर रहे थे, जिनकी संख्या 2024 में घटकर 68,572 हो गई। चीन में भी इसी तरह की गिरावट देखने को मिली है। 2022 में यहां 1967 छात्र पढ़ रहे थे, जिनकी संख्या 2023 में बढ़कर 7279 हो गई, लेकिन फिर 2024 में घटकर 4978 हो गई है। अलग-अलग देशों में पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट की वजह है, विदेश में छात्रों की आबादी कम हुई है। 2023 में 8,92,989 छात्र पढ़ते थे, लेकिन 2024 में 15% गिरावट के साथ ये संख्या 7,59,064 हो गई है।

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