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नरवणे की किताब की समीक्षा कर रही है सेना… पूर्व सैन्‍य अधिकारियों के संस्मरण लिखने पर क्‍या हैं नियम?

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नई दिल्ली

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक किताब की समीक्षा सेना की ओर से की जा रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने पिछले महीने इसके अंश प्रकाशित किए थे। दरअसल द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, इस संस्मरण में पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास रेचिन ला में चीनी सेना के टैंकों की आवाजाही को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ 31 अगस्त 2020 को हुई चर्चा के बारे में बताया गया है। साथ ही पिछले साल शुरू हुई सशस्त्र बलों में भर्ती की अग्निपथ योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा को लेकर भी अहम जानकारी है। फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी नामक यह पुस्तक इस महीने प्रकाशित होने वाली है।

क्या कहता है नियम?
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सेना नियम, 1954 की धारा 21 के तहत, सेना में काम करने वाले अधिकारी या फिर सिविल सेवा में लगे अधिकारियों को अपनी किताब छपवाने के लिए कुछ नियम मानने होते हैं, लेकिन रिटायर्ड अधिकारियों के लिए मामला थोड़ा अलग है। आर्मी के नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक सवाल या सेवा से जुड़े किसी विषय के बारे में जानकारी प्रत्यक्ष या परोक्ष तरीके से मीडिया को नहीं देगा। ऐसा करने की सूरत में उसे केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी। जून 2021 में पर्सनल और ट्रेनिंग विभाग ने नियमों में कुछ बदलाव किए थे, जिसके बाद रिटारयर्ड सरकारी अधिकारियों जिन्होंने खुफिया विभाग या सुरक्षा से जुड़े विभाग में काम किया है, उनके रिटायर होने के बाद भी वो बिना सरकारी अनुमति के कोई चीज़ पब्लिश नहीं कर सकते। एक सूत्र के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि तीनों डिफेन्स सेवाओं को इन नियमों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन उनसे उम्मीद की जाती है कि वो नियमों का पालन करें, ऐसा इसलिए क्योंकि आला अधिकारी को खुफिया और गोपनीय मामलों की जानकारी होती है।

क्या ये नियम जनरल नरवणे पर भी लागू होते हैं?
नियम स्पष्ट रूप से उस प्रक्रिया को नहीं बताते हैं जिसका पालन सेवानिवृत्त रक्षा सेवा अधिकारियों द्वारा पुस्तक प्रकाशित करते समय किया जाना है। कुछ अधिकारियों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सशस्त्र बलों के कर्मियों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 से ली जा सकती है, जिसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जून 2021 में संशोधित किया गया था। यह इस तथ्य के बावजूद है कि सशस्त्र बल इन नियमों के दायरे में नहीं आते हैं। संशोधित नियमों ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों, जिन्होंने खुफिया या सुरक्षा से संबंधित संगठनों में काम किया है, को पूर्व अनुमति के बिना सेवानिवृत्ति के बाद संगठन से संबंधित कोई भी जानकारी प्रकाशित करने से रोक दिया। अधिकारियों ने कहा कि सेवानिवृत्त सिविल सेवक जो इस श्रेणी से संबंधित नहीं हैं, उन्हें पुस्तक प्रकाशित करने के लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। क्या सेना के अन्य अधिकारियों ने पहले किताबें लिखी हैं? हां, अतीत में कई सेवारत और सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों ने सेना से संबंधित विभिन्न विषयों पर किताबें लिखी हैं। पूर्व आर्मी प्रमुख जनरल वीपी मलिक की क़िताब ‘कारगिल: फ्रॉम सरप्राइज़ टू विक्ट्री’ और रिटायर्ड जनरल वीके सिंह की क़िताब ‘करेज एंड कन्विक्शन: ऐन ऑटोबायोग्राफ़ी’ का जिक्र करते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि पहले भी सेना के रिटारयर्ड अधिकारी सेना से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं।

किताब में किन मुद्दों का जिक्र है?
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने अपने संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बातचीत का खुलासा किया है। संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अंश समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा 18 दिसंबर को प्रकाशित किए गए थे। इस किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस को समीक्षा समाप्त होने तक पुस्तक के अंश या सॉफ्ट कॉपी साझा नहीं करने के लिए कहा गया है। इस संस्मरण में दावा किया गया है कि इस पूरे अभ्यास में रक्षा मंत्रालय भी किसी स्तर पर पर शामिल था। अपने संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में नरवणे ने राजनाथ सिंह के निर्देश के साथ-साथ संवेदनशील स्थिति पर उस रात रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) के बीच फोन कॉल की झड़ी का भी जिक्र किया है। इस संस्मरण में 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य गतिरोध की जानकारी दी गई है, जिसमें गलवान घाटी झड़प और अग्निपथ योजना भी शामिल है। पहले यह किताब इसी महीने बाजार में आने वाली थी।

LAC गतिरोध पर पुस्तक में क्या जानकारी है?
प्रकाशित अंशों में 31 अगस्त, 2020 को जनरल नरवणे और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच एक संवाद का वर्णन किया गया है, जब चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रेचिन ला दर्रे में टैंक और सैनिकों को ले जा रहे थे। सिंह ने जनरल नरवणे से कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से बात की है और सेना जैसा उचित लगे वैसा करने के लिए स्वतंत्र है। अंशों के अनुसार, सिंह ने कहा, ‘जो उचित समझो वो करो’। नरवणे ने कहा कि राजनाथ सिंह के फोन के बाद उनके दिमाग में सैकड़ों अलग-अलग विचार कौंध गए। उन्होंने लिखा है, ‘मैंने रक्षा मंत्री को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया, जिन्होंने कहा कि वह रात लगभग साढ़े दस बजे तक मुझसे संपर्क करेंगे, जो उन्होंने किया।’

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