नई दिल्ली।
केंद्र सरकार आगामी आम बजट में विवाहित जोड़ों के लिए वैकल्पिक संयुक्त कर प्रणाली शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य विशेष रूप से एकल आय पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवारों को कर राहत प्रदान करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पति-पत्नी को यह विकल्प मिल सकता है कि वे व्यक्तिगत रूप से या संयुक्त रूप से आयकर रिटर्न दाखिल करें। संयुक्त कर फाइलिंग की स्थिति में आयकर स्लैब का बेहतर उपयोग संभव होगा, जिससे प्रभावी कर देनदारी कम हो सकती है। इसके साथ ही सरकार उच्च प्रभावी छूट, अतिरिक्त कटौतियों और सरचार्ज की सीमा बढ़ाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
सरकार का मानना है कि मौजूदा कर प्रणाली में एकल कमाने वाले परिवारों पर अपेक्षाकृत अधिक कर बोझ पड़ता है, जबकि संयुक्त कर प्रणाली से कर भार का संतुलन बेहतर हो सकता है। प्रस्ताव के अनुसार यह व्यवस्था अनिवार्य नहीं होगी, बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक रहेगी, जिससे करदाता अपने लिए अधिक लाभकारी विकल्प चुन सकेंगे। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो विवाहित जोड़े हर वित्त वर्ष में व्यक्तिगत या संयुक्त कर फाइलिंग में से किसी एक का चयन कर सकेंगे। इसे घरेलू बचत बढ़ाने, उपभोग को प्रोत्साहित करने और कर प्रणाली को अधिक परिवार-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
