मॉस्को
भारत के ब्रह्मोस मिसाइल की दुनिया में धूम मची हुई है। वर्तमान में छह देश ब्रह्मोस को खरीदने के लिए भारत के सामने लाइन में लगे हैं। इस बात की जानकारी खुद ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने दी है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के चीफ जनरल मैनेजर प्रवीण पाठक ने बताया है कि भारत और रूस के संयुक्त उद्यम के तहत बनी इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की बिक्री पर छह देशों से बातचीत चल रही है। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज गति से चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। यह दुनिया की इकलौती ऐसी मिसाइल है, जिसे लड़ाकू विमान, युद्धपोत, जमीनी लॉन्चर और पनडुब्बी से दागा जा सकता है।
ब्रह्मोस को खरीदना चाहते हैं छह देश
सेंट पीटर्सबर्ग में इंटरनेशनल मैरीटाइम डिफेंस शो के मौके पर स्पुतनिक से बात करते हुए प्रवीण पाठक ने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री पर छह देशों के साथ बातचीत चल रही है। ये सभी ऐसे देश हैं, जिनके साथ बातचीत एडवांस स्टेज में है। यह व्यवहारिक रूप से प्री-कॉन्टेक्ट वर्क है। उन्होंने यह भी बताया कि कॉन्ट्रैक्ट में रूचि रखने वाले देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और मध्य-पूर्व के हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान प्रवीण पाठक ने उन देशों के नाम का खुलासा नहीं किया।
कौन-कौन से देश खरीद सकते हैं ब्रह्मोस
जनवरी 2022 में फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय और ब्रह्मोस ने जमीन-आधारित एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति के लिए 375 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया था। इस कॉन्ट्रैक्ट में मिसाइल के ऑपरेटर्स के लिए ट्रेनिंग और एक लॉजिस्टिक सपोर्ट पैकेज शामिल है। इसके अलावा जिन देशों के ब्रह्मोस को खरीदने की अटकलें हैं, उनमें फिलीपींस के अलावा इंडोनेशिया, वियतनाम, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इन देशों के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस को जानें
ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत और रूस का संयुक्त उद्यम है। यह पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या भूमि-आधारित प्लेटफार्मों से लॉन्च करने में सक्षम सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का उत्पादन करता है। इसकी स्थापना 1998 में हुई थी। ब्रह्मोस मिसाइल का नाम ब्रह्मपुत्र और मॉस्को नदियों के नाम को मिलाकर रखा गया था। ब्रह्मोस एयरोस्पेस में रूसी पक्ष का प्रतिनिधित्व एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया कंपनी करती है।
