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चांद पर दिन लेकिन नहीं हुआ Vikram Lander का सवेरा… क्या Chandrayaan-3 मिशन खत्म?

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नई दिल्ली,

Vikram Lander और Pragyan Rover अपनी कुंभकर्णी नींद से उठने का नाम नहीं ले रहे हैं. 20 सितंबर 2023 को इनके लैंडिंग प्वाइंट यानी शिव शक्ति प्वाइंट पर सूरज उग चुका था. उसकी रोशनी पहुंच गई थी. लेकिन विक्रम और प्रज्ञान की आंखें उस रोशनी से चौंधिया नहीं रही हैं. ऐसा लगता है कि उनकी सांसें हमेशा के लिए थम गई हैं.

22 सितंबर 2023 से लगातार इसरो की टीम विक्रम लैंडर को संदेश भेज रही है. अगले कुछ दिनों तक और संदेश भेजते रहेंगे. जब तक फिर से वहां सूरज अस्त नहीं होता. रात फिर से नहीं आती. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि Chandrayaan-3 मिशन का सफलतापूर्वक अंत हो चुका है. भारत ने दुनिया को जो दिखाना था, वो दिखा दिया.

इसरो ने सफलतापूर्वक विक्रम की लैंडिंग कराई. प्रज्ञान रोवर को 105 मीटर तक चलाया. विक्रम लैंडर ने छलांग लगाकर भी दिखाया. ऑक्सीजन जैसी कई जरूरी गैस और खनिजों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है. यह दुनिया का पहला मिशन था, जिसने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपने पैर जमाए थे. चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत चौथा देश था.

उम्मीद रखिए… लेकिन अब मुश्किल ही है विक्रम का जगना
इसके पहले सॉफ्ट लैंडिंग की महारत सिर्फ अमेरिका, सोवियत संघ और चीन के पास थी. जब रात आने लगी तो इसरो वैज्ञानिकों ने विक्रम और प्रज्ञान को सुला दिया. सोने से पहले दोनों की बैटरी फुल चार्ज थी. प्रज्ञान के सोलर पैनल्स सूरज की तरफ थे. ताकि उगते ही सूरज की रोशनी सीधी उस पर पड़े. उम्मीद थी रोशनी मिलने पर वो फिर से एक्टिव होंगे.

मिशन लाइफ पूरी जी चुके हैं विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर
यह जानना जरूरी है कि विक्रम और प्रज्ञान दोनों को सिर्फ 14-15 दिनों के मिशन के लिए ही बनाया गया था. वो पूरा हो चुका है. उससे ज्यादा समय वो वहां पर बिता चुके हैं. अगर ये जग जाते हैं तो ये किसी वैज्ञानिक चमत्कार से कम नहीं होगा. लेकिन ऐसा होना अब मुश्किल दिख रहा है. क्योंकि माइनस 120 से माइनस 240 डिग्री सेल्सियस तापमान में इनमें लगे यंत्रों की सर्किट उड़ने का खतरा था. लगता है कि उनके इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बीती रात की सर्दी बर्दाश्त नहीं कर पाए. सर्दी बर्दाश्त करने वाले हीटर या यंत्र लगाते तो प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ जाती.

खुद से जगने की उम्मीद बाकी है अब भी
विक्रम लैंडर को जब सुलाया गया था, तब उसकी एक सर्किट को जगते रहने का निर्देश दिया गया था. ताकि वो इसरो का 22 सितंबर को भेजा जाने वाला मैसेज रिसीव कर लें. इसरो लगातार संपर्क कर रहा है. लेकिन विक्रम रिएक्ट नहीं कर रहा है. इसरो चीफ डॉ. एस सोमनाथ ने कहा है कि हमें परेशान होने की जरुरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि विक्रम और प्रज्ञान में ऐसी तकनीक भेजी गई है, कि जैसे ही वो पूरी तरह से सूरज की रोशनी से ऊर्जा हासिल कर लेंगे. वो खुद-ब-खुद जग जाएंगे. यानी ऑटोमैटिकली एक्टिव हो जाएंगे. हमें बस उन पर नजर रखनी है. अगली बार अंधेरा होने से पहले शिव शक्ति प्वाइंट से अच्छी खबर मिल सकती है.

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने भी भेजा था संदेश
22 सितंबर 2023 की अलसुबह यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने Vikram को लगातार संदेश भेजा था. लेकिन लैंडर से कमजोर रेसपॉन्स मिल रहा था. यानी उसके पास से जिस तरह की ताकतवर रेडियो फ्रिक्वेंसी आनी चाहिए, वो नहीं आ रही थी. विक्रम 2268 मेगाहर्ट्ज का रेडियो उत्सर्जन कर रहा था. यह एक कमजोर बैंड है. चंद्रयान लगातार ऑन-ऑफ सिग्नल भेज रहा था. चांद से आ रहे सिग्नल कभी स्थिर थे कभी नहीं. विक्रम का ट्रांसपोंडर RX फ्रिक्वेंसी का है. उसे 240/221 की दर की फ्रिक्वेंसी पर काम करना चाहिए. लेकिन वह 2268 मेगाहर्ट्ज का सिग्नल दे रहा है.

शिव शक्ति प्वाइंट पर इस समय दिन है
शिव शक्ति प्वाइंट पर सूरज की रोशनी 13 डिग्री पर पड़ रही है. इस एंगल की शुरुआत 0 डिग्री से 13 पर आकर खत्म हो गई. यानी सूरज की रोशनी विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर टेढ़ी पड़ रही है. 6 से 9 डिग्री एंगल पर सूरज की रोशनी इतनी ऊर्जा देने की क्षमता रखता है कि विक्रम नींद से जाग जाए. अगर नहीं जग रहे हैं तो उनके अंदर किसी तरह की तकनीकी दिक्कत आ चुकी है. ये बात तो तय है कि अगर विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर अगर जग गए और काम करना शुरू कर दिया तो ये इसरो के लिए बोनस होगा.

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