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अनुच्छेद 370 हटाने के मामले में अब रोज होगी सुनवाई, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की तरफ से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के लेकर अहम निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत अब इस मामले की रोज सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच-जजों की पीठ ने अनुच्छेद 370 मामले में 2 अगस्त से रोज सुनवाई करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत अब इन्हीं 23 रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। केंद्र ने पांच मई 2019 को पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा निरस्त कर दिया था। साथ ही इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में विभाजित कर दिया था।

केंद्र ने दाखिल किया था हलफनामा
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने का बचाव किया था। केंद्र ने सोमवार को शीर्ष अदालत से से कहा था कि यह कदम उठाये जाने के बाद जम्मू कश्मीर के पूरे क्षेत्र में ‘अभूतपूर्व’ शांति, प्रगति और समृद्धि देखने को मिली है। केंद्र ने कहा था कि कि आतंकवादियों की तरफ से सड़कों पर की जाने वाली हिंसा और अलगाववादी नेटवर्क अब ‘अतीत की बात’ हो चुकी है। हलफनामें में क्षेत्र की विशिष्ट सुरक्षा स्थिति का संदर्भ देते हुए केंद्र ने कहा था कि आतंकवादी-अलगाववादी एजेंडा से जुड़ी सुनियोजित पथराव की घटनाएं वर्ष 2018 में 1,767 थीं, जो घटकर 2023 में आज की तारीख में शून्य हो गई हैं। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मियों के हताहत होने के मामलों में 2018 की तुलना में 2022 में 65.9 प्रतिशत की कमी का भी जिक्र किया गया था।

7 जजों के पास भेजने से इनकार
मार्च 2020 में पांच जजों की संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 7 न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया था। पांच जजों की पीठ ने कहा कि ऐसा करने का कोई कारण नहीं है कि मामले को बड़ी बेंच को रेफर करें। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को चुनौती देते हुए व्यक्तिगत रूप से, वकीलों, कार्यकर्ताओं और राजनेताओं और राजनीतिक दलों द्वारा कई याचिकाएं दायर की गईं हैं।

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