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ईरान, भारत, चीन, इन तीन तस्वीरों ने बदल दी कई देशों की तस्वीर

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नई दिल्ली

एक ईरानी लड़की देश-दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गई है। इस लड़की की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। कई लोग इसे ईरान में क्रांति का बिगुल बता रहे हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि जब ईरान में इस तरह का विरोध हुआ हो। सितंबर 2022 में मोरैलिटी पुलिस की हिरासत में एक युवा ईरानी महिला महसा अमिनी की मौत के बाद देश भर में बड़े पैमाने पर हिजाब प्रतिबंधों के खिलाफ प्रोटेस्ट शुरू हो गए जिन्हें सरकार ने शक्ति से दबा दिया था।

पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं द्वारा ड्रेस कोड का विरोध बढ़ा है। 1979 की क्रांति के बाद ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया। इन प्रतिबंधों ने कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों द्वारा कई आंदोलनों को जन्म दिया जो अनिवार्य हिजाब को चुनौती देते हैं। दरअसल, दुनिया में इस तरह के कई ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन रहे हैं जिन्होंने देश-दुनिया की दिशा बदलने में अहम भूमिका अदा की है। जानते हैं ऐसी तीन महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में…

शरीर को विरोध में बदल दिया
ईरान में एक लड़की को यूनिवर्सिटी कैंपस में अपने कपड़े उतारने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना शनिवार की है। लड़की ने देश के सख्त इस्लामी ड्रेस कोड के खिलाफ विरोध में अपने कपड़े उतारे थे। ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने ट्विटर इस घटना के संबंध में लिखा कि ईरान में,यूनिवर्सिटी मोरैलिटी पुलिस ने ‘अनुचित’ हिजाब के कारण एक छात्रा को परेशान किया लेकिन उसने पीछे हटने से इनकार कर दिया। उसने अपने शरीर को विरोध में बदल दिया।

जेपी आंदोलन ने बदल थी तस्वीर
भारत में आजादी के बाद कांग्रेस का एक छत्र राज रहा। जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी के पीएम बनने तक करीब 3 दशक तक कांग्रेस एक तरफा रूप से राजनीति में अपना वर्चस्व बनाए हुए थी। इस बीच जेपी के संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने देश की राजनीति को बदलने में अहम भूमिका अदा की। इस आंदोलन में यूनिवर्सिटी के छात्रों की अहम भूमिका रही। जेपी आंदोलन के बाद भारतीय राजनीति का चेहरा पूरी तरह से बदल गया। इसके साथ ही कई सालों के शासन के बाद कांग्रेस की जमीन कमजोर होती दिखी।

जेपी आंदोलन के बाद देश में विपक्षी आवाज को बल मिला। भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन संपूर्ण क्रांति में परिवर्तित होने के बाद व्यवस्था परिवर्तन की तरफ मुड़ गया था। इस आंदोलन में सामाजिक न्याय और जाति विहीन समाज की परिकल्पना शामिल थी। इस आंदोलन ने भविष्य में भारतीय राजनीति को कई बड़े नेता भी दिए।

थियानमेन चौक नरसंहार
चीन में 4 जून 1989 की तारीख और थियानमेन स्क्वायर पर टैंक के सामने एक युवक की तस्वीर देश-दुनिया की कभी ना भूलने वाली तस्वीरों में से एक हैं। चीन ने अपने यहां लोकतंत्र के समर्थन में आवाज को जिस तरह कुचला था उसकी देश-दुनिया में काफी आलोचना हुई थी। चीन ने हजारों निहत्थे छात्रों को टैंक से कुचल दिया था। चीनी सेना पीएल की कार्रवाई में 10 हजार से अधिक छात्रों की मौत हुई थी।

इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्टूडेंट और मजदूर शामिल हुए थे। यह विरोध प्रदर्शन चीन में कम्युनिस्ट नेता और सुधारवाद के समर्थक हू याओबांग की मौत के बाद शुरू हुआ था। यह प्रदर्शन 6 सप्ताह तक चले थे। चीन में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवक की तस्वीर दुनिया के सामने आने के बाद यह स्थान पूरी दुनिया में मशहूर हो गया था।

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