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क्या पीएफआई पर बैन सही है? देश की जनता ने बता दिया मूड, देखें सर्वे रिपोर्ट

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नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने 28 सितंबर को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठन से ‘संबंध’ रखने और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले के बाद संगठन के सदस्यों ने अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। आखिर केंद्र सरकार का संगठन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सही था? पीएफआई पर बैन को लेकर देश के लोग क्या सोचते हैं। इस मुद्दे पर ओपिनियन पोल में लोगों ने अपनी राय रखी। लोगों से पूछा गया था कि पीएफआई पर बैन लगाना सही है?

पीएफआई पर बैन के पक्ष में 75% लोग
सी-वोटर ने अलग-अलग सवालों को लेकर साप्ताहिक सर्वे किया। सर्वे में करीब 4500 लोगों की राय ली गई। सर्वे में पीएफआई पर बैन से जुड़े सवाल के जवाब में 75 प्रतिशत लोगों ने इसे सही फैसला बताया। वहीं, 25 फीसदी लोगों का मानना था कि सरकार की तरफ से पीएफआई पर लगाया गया बैन सही नहीं है। सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि क्या पीएफआई पर बैन सही है?

गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिए थे अधिकार
गृह मंत्रालय ने पीएफआई और उसके आठ सहयोगी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के दो विशेष प्रावधानों का इस्तेमाल करने की शक्ति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दे दी थी। इन संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। कानून के दो प्रावधान प्रतिबंधित संगठन द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले परिसरों को सील करने और कोष के लेनदेन पर रोक लगाने से संबंधित हैं।

SDPI ने बताया था लोकतंत्र पर हमला
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने पीएफआई और उससे सम्बद्ध संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंध को ‘लोकतंत्र पर सीधा हमला’ करार दिया था। पार्टी अध्यक्ष एम. के. फैजी ने एक बयान में कहा था कि ‘जो कोई भी भाजपा सरकार की गलत और जनविरोधी नीतियों’ के विरुद्ध बोलता है उसे गिरफ्तारी और छापेमारी के खतरे का सामना करना पड़ता है। SDPI का कहना था कि सत्ता द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध प्रदर्शन और संगठन की आजादी का दमन किया जा रहा है। यह भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

आतंकियों के लिए पैसे जुटाने का आरोप
संगठन पर हाल में आतंकी वित्त पोषण, हत्याओं, संविधान का अपमान करने, सामाजिक सद्भाव और देश की एकता को भंग करने का आरोप था। गृह मंत्रालय ने अपनी प्रतिबंध अधिसूचना में पीएफआई का ISIS जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूहों से संबंध का हवाला दिया था। गृह मंत्रालय ने कहा कि PFI के कैडरों ने सीरिया, इराक और अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियों में भाग लिया। उनमें से कई मारे गए या गिरफ्तार किए गए। अधिसूचना में कहा गया है कि पीएफआई भारत के संवैधानिक प्राधिकरण के प्रति अनादर दिखाता है, और बाहर से धन और वैचारिक समर्थन के साथ, यह आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।

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