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Tuesday, April 28, 2026
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इसरो ने पूरा किया चंद्रयान-3 मिशन का’लॉन्च रिहर्सल’, अब बस उड़ान का है इंतजार

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बेंगलुरु\चेन्नै

14 जुलाई को भारत के तीसरे चंद्रमा मिशन के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती सोमवार को ‘लॉन्च रिहर्सल’ के पूरा होने के साथ जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने सोमवार को कहा कि पूरी लॉन्च तैयारी और 24 घंटे तक चलने वाली प्रक्रिया का ‘लॉन्च रिहर्सल’ पूरा हो गया है। 14 जुलाई को सुबह तड़के ठीक 2.50 बजे के बाद भारत का चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान रॉकेट एलवीएम3 के जर‍िए लॉन्‍च होने के बाद अपनी लंबी चंद्रमा यात्रा शुरू करेगा। लगभग 3.84 लाख किमी की यात्रा के बाद चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के 23 या 24 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर उतरने की उम्मीद है।

​चंद्रयान-3 का वजन क‍ितना
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान में एक प्रोपल्शन मॉड्यूल (वजन 2,148 किलोग्राम), एक लैंडर (1,723.89 किलोग्राम) और एक रोवर (26 किलोग्राम) शामिल है। इससे पहले चंद्रयान -2 पेलोड का वजन लगभग 3.8 टन था, ऑर्बिटर का वजन 2,379 किलोग्राम था, विक्रम लैंडर का वजन 1,444 किलोग्राम (प्रज्ञान रोवर 27 किलोग्राम सहित) था।

​चंद्रयान -3 के हैं क‍ितने फेज
इसरो के अनुसार, चंद्रमा मिशन को तीन फेज में बांटा गया है – पृथ्वी-केंद्रित चरण (प्री-लॉन्च, लॉन्च और एसेंट और पृथ्वी-बाउंड पैंतरेबाज़ी), चंद्र ट्रांसफर फेज (ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी), और चंद्रमा केंद्रित चरण (चंद्र कक्षा) सम्मिलन चरण, चंद्रमा-बाध्य पैंतरेबाज़ी चरण, प्रोपल्शन मॉड्यूल और चंद्र मॉड्यूल सेपरेशन, डी-बूस्ट चरण, प्री-लैंडिंग चरण, लैंडिंग चरण, लैंडर और रोवर के लिए सामान्य चरण, प्रोपल्‍शन मॉड्यूल के लिए चंद्रमा केंद्रित सामान्य कक्षा चरण (100 किमी गोलाकार कक्षा)। पहले चरण के दौरान भारत का भारी लिफ्ट रॉकेट 43.5 मीटर ऊंचा और 642 टन एलवीएम3 वजनी, चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को ले जाएगा। रॉकेट के पास लगातार छह सफल मिशनों का त्रुटिहीन रिकॉर्ड है।

​चंद्रयान -3 कब होगा लॉन्‍च​
यह एलवीएम3 की चौथी ऑपरेशनल उड़ान है, और इसका मकसद चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान को जियो ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में लॉन्च करना है। 14 जुलाई को दोपहर 2.35 बजे तीन चरणों वाला एलवीएम3 रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा रॉकेट पोर्ट के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च होगा, जबकि पहले रॉकेट का पहला चरण ठोस ईंधन द्वारा संचालित होता है, दूसरा चरण तरल ईंधन द्वारा संचालित होता है, और तीसरे और अंतिम चरण में तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन द्वारा संचालित क्रायोजेनिक इंजन होता है। तीनों चरणों को मिलाकर विस्फोट के समय 642 टन के रॉकेट का कुल प्रणोदक द्रव्यमान 553.4 टन होगा। अपनी उड़ान में केवल 16 मिनट से अधिक समय बाद रॉकेट लगभग 179 किमी की ऊंचाई पर चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान को बाहर निकाल देगा।

​क्‍या है चंद्रयान मिशन-3 का मुख्य मकसद
चंद्रयान मिशन-3 का मुख्य मकसद लैंडर को चंद्रमा की धरती पर सुरक्षित उतारना है। उसके बाद रोवर प्रयोग करने के लिए बाहर निकलेगा। लैंडर से बाहर निकलने के बाद प्रोपल्शन मॉड्यूल की ओर से ले जाए गए पेलोड का जीवन तीन से छह महीने के बीच है। दूसरी ओर, इसरो ने कहा कि लैंडर और रोवर का मिशन जीवन 1 चंद्र दिवस या 14 पृथ्वी दिवस है। इसरो ने कहा क‍ि नासा के एक इनऐक्‍टिव लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर ऐरे को चंद्र लेजर रेंजिंग स्‍टडी के लिए समायोजित किया गया है। दूसरी ओर रोवर लैंडिंग स्थल के आसपास के क्षेत्र में बेस‍िक स्‍ट्रक्‍चर हास‍िल करने के लिए अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस) ले जाएगा।

​लैंडर और रोवर के नामकरण पर चुप है इसरो
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मिशन 2019 में असफल चंद्रयान -2 मिशन का फॉलोअप है, क्‍योंकि विक्रम नामक लैंडर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चंद्रयान-2 मिशन के दौरान चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हुए लैंडर की तुलना में इस बार लैंडर में किए गए बदलावों के संबंध में लैंडर में पांच के बजाय चार मोटर हैं। अंतरिक्ष एजेंसी ने सॉफ्टवेयर में कुछ बदलाव भी किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसरो इस बार लैंडर और रोवर के नामकरण पर चुप है। चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर का नाम विक्रम और रोवर का नाम प्रज्ञान रखा गया था।

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