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रिटायरमेंट से ठीक पहले मां को खोने का गम, जस्टिस अभय एस. ओका दो दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट में लौटे

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नई दिल्ली

‘मैं कई साल से अपनी मां को समय नहीं दे पाया, अब रिटायरमेंट के बाद कुछ समय उनके साथ रहूंगा,’ बुधवार को अपने विदाई समारोह से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका कुछ वकीलों से ये बात कह रहे थे। उस समय शायद उन्हें ये नहीं पता था कि मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती उनकी मां वसंती ओका अंतिम सांस ले रहीं। शाम तक जस्टिस ओका को यह खबर मिल गई। सूचना मिलते ही जस्टिस अभय एस. ओका मुंबई रवाना हो गए।

जस्टिस ओका की मां का निधन
जस्टिस अभय एस. ओका ने मुंबई जाने से पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई और साथी जजों को अपनी माता के निधन की जानकारी दी। इसके बाद जस्टिस ओका मुंबई रवाना हुए और गुरुवार दोपहर उन्होंने ठाणे में अपनी मां का अंतिम संस्कार किया। आमतौर परिवार में अगर किसी नजदीकी की मृत्यु हो जाती है तो यह क्रियाएं कई दिनों तक चलती हैं। लेकिन जस्टिस ओका के पास एक और बड़ी जिम्मेदारी थी। उन्हें कई मामलों पर फैसला सुनाना, जिनकी सुनवाई उन्होंने पहले ही कर रखी है। कई मामलों में उन्होंने फैसला सुरक्षित रख लिया था। ये फैसले गुरुवार को आने थे।

मां का अंतिम संस्कार करके दो दिन में ही कोर्ट लौटे
अपनी मां को खोने के बावजूद जस्टिस ओका दो दिन बाद यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। शीर्ष सूत्रों ने बताया कि जस्टिस ओका ने शुक्रवार को फैसला सुनाने और मामलों की सुनवाई करने के लिए कोर्ट आने का फैसला किया है। शुक्रवार, 24 मई ही उनका आखिरी वर्किंग डे है। सुप्रीम कोर्ट के एक जज के मुताबिक, जस्टिस ओका की संस्था के प्रति गहरी प्रतिबद्धता है। पिछले रविवार को जस्टिस ओका मुंबई में जस्टिस गवई के सम्मान में आयोजित एक समारोह में शामिल होने गए थे। यहीं पर उन्होंने आखिरी बार अपनी मां से मुलाकात की थी।

शुक्रवार को जस्टिस अभय एस. ओका का लास्ट वर्किंग डे
जस्टिस ओका के विदाई समारोह का आयोजन करने वाले सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन नायर ने कहा कि जस्टिस ओका जैसे जज एक पीढ़ी में एक बार आते हैं। अपने पहले नाम ‘अभय’ की तरह वे निडरता, साहस, बेदाग चरित्र और बेदाग ईमानदारी के प्रतीक हैं। उनके फैसले इन गुणों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि कल एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति के बावजूद, जस्टिस ओका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में वापस आएंगे और आखिरी बार बेंच की शोभा बढ़ाएंगे। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस देश के अब तक के सबसे महान जजों में से एक के साथ समय बिताने का मौका मिला।

जानिए जस्टिस ओका का प्रोफाइल
जस्टिस ओका ने ठाणे जिला न्यायालय में अपने पिता के चैंबर में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी। अगस्त 2003 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और नवंबर 2005 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। मई 2019 में, उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और अगस्त 2021 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

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