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Monday, May 4, 2026
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पश्चिम को भी दिया था रामायण का ज्ञान, स्वामी विवेकानंद के राम पर क्या विचार थे?

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स्वामी विवेकानंद के जीवन पर माता सीता और भगवान राम का काफी प्रभाव था। स्वामी विवेकानंद का रामायण से परिचय उनकी मां भुवनेश्वरी देवी ने करवाया था। बचपन में विवेकानंद घर के पास होने वाली हर रामायण पाठ को सुनने के लिए जाते थे। इसके बारे में वह अपनी मां से भी सुनते थे। स्वामी विवेकानंद के जीवन पर माता सीता और श्रीराम का गहरा असर रहा। रामायण पाठ को सुनकर वह आनंद का अनुभव करते। स्वामी विवेकानंद ने माता सीता और प्रभु श्रीराम का गुणगान पश्चिम में भी किया।

पश्चिम की धरती पर रामायण का ज्ञान​
उनके जीवन पर भगवान श्रीराम का कितना प्रभाव था यह उनके व्याख्यान से भी पता चलता है। पश्चिम के दूसरे प्रवास के दौरान अमेरिका स्थित शेक्सपियर क्लब में रामायण शीर्षक पर दिए व्याख्यान की आज भी चर्चा होती है। यह व्याख्यान इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रामायण पर पश्चिम के लोगों के सामने उनकी भूमि पर दिया व्याख्यान था। इस दौरान स्वामी विवेकानंद ने कहा कि राम और सीता भारत के आदर्श हैं। स्वामी विवेकानंद ने भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन पश्चिम के सामने रखकर भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का परिचय कराया।

पूरे दुनिया का साहित्य छान लो
मद्रास में स्वामी विवेकानंद माता सीता और प्रभु श्रीराम का श्रेष्ठ और प्रेरणादायी जीवन युवाओं के सामने रखते हैं। उन्होंने कहा दुनिया के समस्त प्राचीन साहित्य छान लो। संसार के दूसरे साहित्य का भी मंथन कर लो उसमें से तुम सीता के समान दूसरा चरित्र नहीं निकाल सकोगे। सीता चरित्र अद्वितीय है। माता सीता भारतीय स्त्रियों की आदर्श हैं। स्वामी विवेकानंद ने माता सीता को राष्ट्रीय देवी की संज्ञा दी।

​​बचपन में स्वामी जी को जब यह पता चला ​
स्वामी विवेकानंद के जीवन पर हनुमान जी का भी गजब का प्रभाव था। बचपन में स्वामी जी को जब यह पता चला कि हनुमान जी अमर हैं और वनों में निवास करते हैं तो वह घर के पास केले के बाग में इस उम्मीद से पहुंच गए कि वह दर्शन देंगे। स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि हनुमान सेवा आदर्श का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे सम्पूर्ण विश्व को आश्चर्यचकित कर देने वाले वीरतापूर्ण साहस का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें राम की भलाई के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में तनिक भी संकोच नहीं था।

​​जो निकल गया उसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए
स्वामी विवेकानंद युवाओं से यही कहते थे कि हर स्थिति और परिस्थिति में आगे बढ़ते जाने का ही नाम जीवन है। वह कहते थे कि जीवन में कभी निराश और हताश होकर लक्ष्य की प्राप्ति नहीं की जा सकती। समय हमारा जो निकल गया उसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने खुद पर आत्मविश्वास और विश्वास की बात कही। उनके विचार आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरित करते हैं न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में।

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