15.5 C
London
Wednesday, April 1, 2026
Homeराष्ट्रीयदलित मुस्लिम और ईसाइयों के आरक्षण के लिए बने आयोग को रद्द...

दलित मुस्लिम और ईसाइयों के आरक्षण के लिए बने आयोग को रद्द करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Published on

नई दिल्ली,

धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम या ईसाई बनने वाले दलितों को अनुसूचित जाति के दर्जा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है. इसमें ऐसे लोगों को SC का दर्जा देने की जांच के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए आयोग को भी रद्द करने की मांग भी की गई है.  याचिकाकर्ता ने कहा है कि दलितों को ईसाई और इस्लाम अपनाने के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा देने और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं. याचिका में शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि इस याचिका की जल्द से जल्द सुनवाई की जाए.

इसमें कहा गया है कि मुख्य याचिका कोर्ट के सामने सालों से लंबित है और यदि केंद्र सरकार द्वारा गठित आयोग ने अनुमति दी तो इसकी सुनवाई में और भी देरी हो सकती है. इस तरह की देरी से अनुसूचित जाति मूल के ईसाइयों को अपूरणीय क्षति होगी, जिन्हें पिछले 72 साल से अनुसूचित जाति के इस विशेषाधिकार से वंचित रखा गया है. कोर्ट को केंद्र की सामग्री के आधार पर अंतिम निर्णय देने के लिए आगे बढ़ना चाहिए.

इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि दो साल की अवधि के बाद जब तक इस आयोग की रिपोर्ट नहीं दी जाती तब तक अदालत को सुनवाई नहीं रोकनी चाहिए. बता दें कि याचिकाकर्ता एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जोकि अनुसूचित जाति मूल के ईसाइयों के महार समुदाय से संबंधित है.

हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के दलित SC में शामिल 
बता दें कि वर्तमान में संविधान के (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार, केवल हिंदुओं, सिख और बौद्ध धर्म के दलितों को अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. दलित ईसाई और धर्मान्तरित मुस्लिमों के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा देने की याचिका पहले से ही SC के समक्ष लंबित है. तर्क है कि अनुसूचित जाति की सूची से ईसाई और मुस्लिम दलितों को बाहर करना भेदभावपूर्ण है.

केंद्र ने गठित किया था तीन सदस्यीय आयोग 
इस मामले में केंद्र सरकार ने अक्टूबर, 2022 में ये जांचने के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित किया कि क्या दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जा सकता है, जिन्होंने हिंदू धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म के अलावा अन्य धर्मों में परिवर्तन किया है. हाल ही में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सरकार ने जस्टिस मिश्रा की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया है. धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग की 2007 की रिपोर्ट ने इस्लाम और ईसाई धर्म में परिवर्तित दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का समर्थन किया था.

Latest articles

भेल के प्रेस शॉप में ठेका मजदूर घायल

भेल कारखाने के प्रेस शॉप में एक दुर्घटना हो गई है जिसमें एक ठेका...

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

मानव संसाधन विभाग की ई-पत्रिका ‘आभास’ अंक-05 का विमोचन

भोपाल मानव संसाधन विभाग की ई-पत्रिका आभास के अंक-05 का विमोचन महाप्रबंधक (मानव संसाधन) ठाकुर...

एक अप्रैल से ‘स्कूल चलें हम’ अभियान की शुरुआत

भोपाल मप्र में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत 1 अप्रैल से स्कूल चलें हम...

More like this

युवा विधायक सम्मेलन में जुटे दिग्गज, ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प पर हुआ मंथन

भोपाल मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय 'युवा विधायक सम्मेलन' के दूसरे दिन संसदीय गरिमा...

1 अप्रैल से जेब पर बढ़ेगा बोझ: नेशनल हाईवे पर सफर होगा 5 से 10% तक महंगा

आने वाली 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे पर सफर करना आपकी जेब पर भारी...