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Ratan Tata Death Anniversary: निधन के बाद टाटा ग्रुप में बड़े बदलाव और वसीयत का चौंकाने वाला खुलासा!

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Ratan Tata Death Anniversary: आज (9 अक्टूबर 2025) महान उद्योगपति रतन टाटा की पहली पुण्यतिथि है. 9 अक्टूबर 2024 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था. उनके जाने के बाद, पिछले एक साल में टाटा समूह में नेतृत्व सहित कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. हालांकि, इन बदलावों के साथ-साथ समूह के भीतर कई विवाद भी सामने आए हैं.

28 दिसंबर 1937 को जन्मे रतन टाटा, टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के परपोते थे. बचपन में माता-पिता के अलग होने के बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया था. विदेश में पढ़ाई के बाद भारत लौटने पर उन्होंने लगभग पाँच साल तक टाटा स्टील में मजदूरों के साथ काम किया था. रतन टाटा ने न केवल टाटा समूह के कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया, बल्कि भारतीय उद्योग जगत को भी मज़बूती दी. उन्होंने Paytm से लेकर Ola जैसी 40 से ज़्यादा छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स में निवेश किया, जिनमें से 18 आज बड़े नाम बन चुके हैं.

टाटा ट्रस्ट्स में छिड़ा अंदरूनी विवाद

रतन टाटा के निधन के बाद, उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला ट्रस्ट के भीतर सर्वसम्मत नहीं था. इसके बाद, ट्रस्ट के भीतर मेहली मिस्त्री जैसे शक्तिशाली पुराने सदस्यों का एक गुट उभरा, जो नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के फैसलों पर सीधा प्रभाव डालना चाहता था.

ट्रस्ट के इस अंदरूनी संघर्ष का सबसे ज्यादा असर टाटा संस बोर्ड पर पड़ा. कुछ नॉमिनी निदेशकों के रिटायर होने के कारण सीटें खाली हो गईं, लेकिन नोएल टाटा और मिस्त्री गुट किसी भी नाम पर सहमत नहीं हो पा रहे थे. उदय कोटक जैसे प्रमुख नामों को भी खारिज कर दिया गया था.

नोएल टाटा की बोर्ड में एंट्री

रतन टाटा के निधन के बाद, अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का अध्यक्ष बनाया गया. टाटा ट्रस्ट्स, टाटा समूह के 65% शेयरों को नियंत्रित करता है. इसके बाद, नवंबर 2024 में नोएल टाटा को टाटा संस बोर्ड में भी शामिल किया गया. 2011 के बाद यह पहला मौका है, जब टाटा परिवार का कोई सदस्य एक साथ इन दोनों बोर्ड में शामिल हुआ है.

वसीयत का चौंकाने वाला खुलासा

देश के सबसे सम्मानित उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा की वसीयत से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. उन्होंने अपनी 3,900 करोड़ रुपये की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा अपने परिवार के किसी सदस्य को नहीं, बल्कि एक लंबे समय के सहयोगी को दिया है. वसीयत में ताज होटल्स ग्रुप के पूर्व निदेशक मोहिनी मोहन दत्ता को शामिल किया गया है, जिन्हें लगभग 588 करोड़ रुपये की संपत्ति मिलेगी.

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परिवार के बाहर सिर्फ एक व्यक्ति को हिस्सा

रतन टाटा की वसीयत में उनके परिवार के बाहर सिर्फ एक व्यक्ति, मोहिनी मोहन दत्ता को संपत्ति में हिस्सा दिया गया है. उन्हें रतन टाटा की अवशिष्ट संपत्ति (Residual Estate) का एक तिहाई हिस्सा मिलेगा, जिसका मूल्य अनुमानित 1,764 करोड़ रुपये है. इस हिसाब से मोहिनी मोहन दत्ता को करीब 588 करोड़ रुपये मिलेंगे. हालाँकि, शुरुआत में उन्होंने वसीयत की शर्तों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अब उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है, जिससे वसीयत को लागू करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है.

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