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जज, CA और एसीबी अफसरों पर लगे गंभीर आरोप, हाई कोर्ट पहुंचा रिकॉर्ड कीपर, HC ने जारी किया नोटिस

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नई दिल्ली:

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में मुकेश कुमार नाम के एक शख्स की याचिका पर दिल्ली सरकार और उसकी एंटी करप्शन ब्रांच को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कुमार दिल्ली में स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में अहल्मद (रिकॉर्ड कीपर) हैं, जो खुद के और अन्य के खिलाफ एसीबी की एफआईआर को रद्द करने की गुहार हाई कोर्ट से लगा रहे हैं।

मामला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों और बीएनएस की धारा 308 के अंतर्गत दर्ज किया गया है, जिसकी जांच के दायरे में एक सीए और उस जज को भी बताया जा रहा है, जिनकी कोर्ट में मुकेश कुमार हाल फिलहाल में तैनात थे। प्रकरण की भनक हाई कोर्ट को भी है, जिसने 20 मई को उस जज को तत्काल प्रभाव से राउज एवेन्यू से रोहिणी कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश पारित किया है।

अग्रिम जमानत के लिए दी कोर्ट में अर्जी
जस्टिस अमित शर्मा ने 20 मई को मुकेश कुमार की याचिका पर दिल्ली सरकार के जरिए एसीबी को नोटिस जारी किया और 29 मई को अगली सुनवाई से पहले मामले में अपना जवाब/स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया। इससे पहले मुकेश कुमार ने राउज एवेन्यू कोर्ट में ही अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी। 21 मई को अर्जी स्पेशल जज दीपाली शर्मा के सामने सुनवाई के लिए, जिन्होंने दोनों पक्षों से कुछ सफाइयां मांगी और सुनवाई के लिए 22 मई की तारीख तय कर दी, जिसमें अपडेट बाकी है।

लगा बेईमानी से काम करने का आरोप
याचिका में कुमार ने 5 राहतें मांगी, जिनमें एसीबी को एफआईआर नंबर 33/2025 रद्द करने, केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर करने, केंद्रीय जांच एजेंसी को निष्पक्षता के साथ जांच करने और याचिकाकर्ता को व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट, 2011 की धारा 11(2) के मुताबिक एसीबी के हाथों परेशान किए जाने से संरक्षण देने का अनुरोध शामिल है। इसके अलावा कुमार की एक मांग एसीबी के दो अधिकारियों- जॉइंट कमिश्नर मधुर वर्मा और एसीपी जर्नेल सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की है, जिन पर गुप्त और बेईमानी से काम करने, भ्रष्टाचार, ब्लैकमेलिंग, धमकाने, स्टेट मशीनरी के गलत इस्तेमाल, जालसाजी और गवाहों को धमकाने और आधिकारिक रिकॉर्ड का नष्ट करने के याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है।

कमिश्नर को जारी किया था नोटिस
कुमार की ओर से कोर्ट में कई सीनियर एडवोकेट, जैसे मोहित माथुर, तनवीर अहमद मीर, मनिंदर सिंह एडवोकेट आयूष जैन के साथ पेश हुए। स्पेशल जज(पीसी एक्ट)(एसीबी) द्वारा 16 मई को पारित आदेश के बाद मौजूदा एफआईआर दर्ज की गई। इस आदेश के जरिए एसीबी के जॉइंट कमिश्नर के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे पूछा गया था कि क्यों न हाई कोर्ट से अदालत अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।

पर्याप्त सबूत, आरोपों की जांच जरूरी
दूसरी तरफ एसीबी की ओर से पेश एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल संजीव भंडारी ने कहा कि जनवरी 2025 में ही दिल्ली सरकार के विधि विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को जरूरी सामग्री भिजवा दी गई थी, जो हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा इस कोर्ट की प्रशासनिक समिति के समक्ष पेश की गई। उन्होंने आगे कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों को न्यायोचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री है, जिसकी जांच जरूरी है।

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