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कहीं भारत में भी न बन जाए कैलिफोर्निया जैसे हालात, इस बड़ी वजह से फैली जंगल की आग

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हॉलीवुड के घर में आग लगी हुई है। अमेरिका का Loss Angeles जो अपनी शानो-शौकत के लिए जाना जाता है, आज वहां सिर्फ धुआं ही धुआं है। बड़ी-बड़ी हस्तियों के आलीशान घर राख के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। अब तक 24 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 12,000 से ज्यादा घर तबाह हो चुके हैं। जंगल की आग ऐसी फैली कि कई इलाकों को देखते ही देखते अपनी चपेट में ले लिया। इतने दिन बीत जाने के बाद भी आग पर काबू पाना चुनौती ही बना हुआ है। लेकिन अगर हम ये सोच रहे हैं कि ये ‘तबाही’ तो अमेरिका में मची है..हमें इसके बारे में टेंशन लेने की क्या है जरूरत है, तो शायद हम गलत हैं।

ये ‘आग’ हमारे लिए भी मुसीबत का सबब बन सकती है। बस शायद उसका चेहरा कुछ अलग हो। पूरी कहानी समझने के लिए पहले जानते हैं कि अमेरिका जैसा समृद्ध देश, आखिर कैसे LA में फैली आग को रोकने में नाकामयाब रहा। जांच में जो चीज सामने आई, वो यह थी कि जब आग फैलने लगी तो उसे बुझाने के लिए प्रशासन के फायर टैंक ही सूख चुके थे। टैंक में इतना पानी ही नहीं था कि वो आग पर काबू पा सकते।

कैलिफोर्निया में जंगल की आग की स्थिति आमतौर पर जून-जुलाई में देखने को मिलती है। लेकिन इस बार कम बारिश ने स्थिति को खराब कर दिया है। कैलिफोर्निया का दक्षिणी हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। इस क्षेत्र में पिछले साल बहुत ही कम बारिश हुई। इस वजह से दिसंबर 2024 में यहां 60 फीसदी से ज्यादा हिस्से में सूखे की स्थिति बन गई। US Drought Monitar Map के मुताबिक द‍िसंबर 2024 में कैलिफोर्निया का सिर्फ 40.9 फीसदी ही ऐसा रहा, जो सूखे की चपेट में नहीं था। जबकि जनवरी, 2024 में यह 96.65 प्रतिशत था। जलवायु परिवर्तन की वजह से सूखी हवाएं ज्यादा लंबे समय तक चलती रहीं हैं।

भारत को क्यों सजग होने की जरूरत
कैलिफोर्निया जैसे हालात भारत में कभी भी बन सकते हैं। उत्तराखंड के नैनीताल के जंगलों की भीषण आग का उदाहरण हमारे सामने ही है। मगर बात सिर्फ आग की नहीं है बल्कि लगातार घटते पानी की है। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम के चक्र में महसूस हो रहे बदलाव की है। कहीं सूखा है तो कहीं तेज बारिश। ICIMOD (इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट) की एक रिपोर्ट के मुताबिक Ganga River Basin में लगातार गिरावट हो रही है। पिछले 2 दशक में उत्तर भारत में 450 क्यूबिक किलोमीटर ग्राउंड वाटर कम हो चुका है। Forest Survey of India (FSI) के मुताबिक भारत में 36 फीसदी जंगल ऐसे हैं, जहां आग लगने का खतरा बना रहता है।

जल संकट के मामले में शीर्ष 10 शहर
दिल्ली
बेंगलुरु
चेन्नई
हैदराबाद
मुंबई
अहमदाबाद
जयपुर
कोलकाता
पुणे
नागपुर

इन 3 उदाहरण से समझिए संकट कितना बड़ा

नैनीताल
पिछले साल उत्तराखंड के टूरिस्ट स्पॉट नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल में जंगल की आग ने भारी नुकसान किया। उत्तराखंड के कई इलाकों में फैली आग ने 30 एकड़ से ज्यादा जंगल को जला दिया। आग इतनी भयंकर थी कि वायु सेना को बचाव कार्य के लिए जुटना पड़ा। हालांकि आग लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन एक चीज जो कैलिफोर्निया और नैनीताल में कॉमन है, वो है पानी की कमी।

नैनीताल की नैनी झील का पानी पिछले पांच साल में 18 फीट तक घट चुका है। भीमताल का जल स्तर 1985 में जहां 22 मीटर था, वो अब घटकर 17 मीटर ही रह चुका है। एक अनुमान के मुताबिक इस पूरे क्षेत्र में 60 से ज्यादा छोटी-बड़ी झीलें थीं, जिनमें से अधिकतर अब सूख चुकी हैं। पहाड़ पर सूखे जैसे हालात बनते जा रहे हैं।

शिमला
हिमाचल की राजधानी शिमला में गर्मियों के दिनों में पानी की किल्लत का सामना करना आम बात हो गई है। पानी के स्रोत जैसे गिरी, अश्विनी खड्ड, गुम्मा जलाशयों में जल स्तर लगातार कम हो रहा है। साल 2021 में यह स्तर घटकर 2 मिलियन गैलन प्रति दिन रह गया था, जबकि उस समय मांग 6 मिलियन गैलन प्रति दिन थी। शिमला को आमतौर पर 43 मिलियन लीटर पानी हर रोज चाहिए जबकि उसे 30 मिलियन लीटर पानी (MLD) ही मिल पा रहा है। लगातार बढ़ते होटल-जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन से यहां Day Zero जैसी स्थिति बन गई थी।

बेंगलुरु
देश के IT Hub बेंगलुरु की आबादी 1990 की तुलना में तीन गुना तक बढ़ चुकी है। शहरीकरण इतनी तेजी से हो रहा है कि शहर के सामने Day Zero की स्थिति बन गई थी। Day Zero से मतलब जब एक भी बूंद पानी न बचे। हर रोज यहां 300 से 500 मिलियन लीटर पानी कम रह जाता है। ऐसा नहीं है कि यह सब अचानक से हो गया है। बेंगलुरु में कभी 262 झीलें हुआ करती थीं, जो अब घटकर 81 रह गई हैं। 66 फीसदी जंगल इस क्षेत्र से कम हो चुका है। 74 फीसदी झीलें खत्म हो चुकी हैं।

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