9.3 C
London
Saturday, March 28, 2026
Homeराष्ट्रीययमुना संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 4 महीने में टैप करने...

यमुना संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 4 महीने में टैप करने होंगे सभी नाले, नहीं चलेगा कोई बहाना

Published on

आगरा

यमुना संरक्षण को लेकर आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन द्वारा यमुना डिसिल्टिंग की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं न्यायमूर्ति उज्जवल भुआन की पीठ ने सुनवाई की। जिसमें मुख्य रूप से यमुना में प्रवाहित होने वाले नालों की अन्तरिम व अन्तिम व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में विचार मंथन हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने यमुना में गिरने वाले सभी नालों को 4 महीने के भीतर टैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए ये भी कहा है कि अनुपालन आख्या तक मामला लंबित रहेगा।

न्यायालय ने कहा कि नगर निगम आगरा ने अपने शपथ पत्र में 23 अनटेप्ड नालों के टैपिंग कार्य को अप्रैल 2025 तक पूरा करने की बात कही थी, लेकिन उसके अनुपालन का कोई ब्यौरा नहीं है। इसको लेकर न्यायालय ने आदेश दिया कि इन 23 अनटेप्ड नालों का टैपिंग का कार्य 15 मई तक पूरा कर दिया जाए।

साथ ही अनुपालन आख्या अगले एक सप्ताह के अन्दर दाखिल कर दी जाए। इसके अलावा शपथ पत्र में 6 अनटेप्ड नालों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार से शपथ पत्र की मांग की गई है। न्यायमित्र एडीएन राव द्वारा न्यायालय को यह इंगित किया गया कि इस कार्य को समाप्त करने के लिए डीपीआर में क्या समय सीमा है। तो न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 4 माह के अन्दर कार्य को समाप्त करना होगा।

38 नालों की टैपिंग अंतिम चरण
शहर के 38 अनटैप्ट नालों के संबंध में 2 साल से योजना एव्प्रुव नहीं हो पा रही है। यूपी जल निगम (अर्बन) द्वारा संशोधित डीपीआर प्रस्तुत की गई। जिसमें न्यायालय ने आदेश दिया है कि अगली एक्जीक्यूटिव बैठक में डीपीआर स्वीकृत कर दी जाए। जिसके बाद कार्य को तुरंत शुरू कर दिया जाए। इस संबंध में जल निगम अर्बन द्वारा कार्य समाप्त करने की समय सीमा एक माह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर बताने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि इसकी आखिरी तिथि किसी भी स्थिति में मिशन द्वारा स्वीकृति की दिनांक से 3 महीने से अधिक नहीं होगी। 38 अनटैप्ड परियोजना राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजी गयी है। इस संबंध में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा न्यायालय के समक्ष नोट प्रस्तुत किया गया था। 38 अनटैप्ड नालों में 176 करोड़ से अधिक खर्च होने की योजना है।

पर्यावरणविद अधिवक्ता केसी जैन का कहना
सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है। जिसमें यमुना में गिरने वाले सभी नालों की टैपिंग 4 माह में पूरी करने को कहा गया है। अब समय है कि नगर निगम और जल निगम बिना देरी किए इस पर अमल करें। यमुना हमारी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। यह आदेश यमुना को स्वच्छ और जीवंत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग रंग लेकर आएगी।

Latest articles

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटी, कीमतों को स्थिर रखने का फैसला

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10-₹10 प्रति लीटर की...

भोपाल में खौफनाक वारदात: 80 उपद्रवियों के बीच फंसा परिवार, 6 साल की मासूम के सिर पर तलवार से हमला

भोपाल राजधानी के शाहजहानाबाद इलाके में बुधवार देर रात मानवता को शर्मसार करने वाली घटना...

पटरी पार करते समय बड़ा हादसा: ट्रेन की चपेट में आने से बुजुर्ग पूर्व टेलर की मौत

भोपाल राजधानी के ऐशबाग थाना इलाके में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक रेल हादसा हो गया।...

भोपाल: ऐतिहासिक ईदगाह मस्जिद में मोबाइल टावर निर्माण पर बवाल, AIMIM कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी झड़प

भोपाल राजधानी की ऐतिहासिक ईदगाह मस्जिद की पार्किंग में मोबाइल टावर लगाए जाने को लेकर...

More like this

रामनवमी पर प्रदेशभर में धार्मिक आयोजन, मंदिरों में विशेष पूजा और भंडारे

भोपाल रामनवमी के पावन अवसर पर मप्र के विभिन्न शहरों में श्रद्धा और उत्साह के...

राजधानी में दो दिन में छह नाबालिग किशोरियां लापता, पुलिस ने शुरू की तलाश

भोपाल राजधानी में दो दिनों के भीतर शहर के अलग-अलग इलाकों से आधा दर्जन नाबालिग...

दादाजी धाम मंदिर में धूमधाम से मनाया गया श्री राम जन्मोत्सव

भोपाल रायसेन रोड स्थित पटेल नगर के प्रसिद्ध आस्था केंद्र दादाजी धाम मंदिर में शुक्रवार...