9.3 C
London
Thursday, March 12, 2026
Homeराष्ट्रीययमुना संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 4 महीने में टैप करने...

यमुना संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 4 महीने में टैप करने होंगे सभी नाले, नहीं चलेगा कोई बहाना

Published on

आगरा

यमुना संरक्षण को लेकर आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन द्वारा यमुना डिसिल्टिंग की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं न्यायमूर्ति उज्जवल भुआन की पीठ ने सुनवाई की। जिसमें मुख्य रूप से यमुना में प्रवाहित होने वाले नालों की अन्तरिम व अन्तिम व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में विचार मंथन हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने यमुना में गिरने वाले सभी नालों को 4 महीने के भीतर टैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए ये भी कहा है कि अनुपालन आख्या तक मामला लंबित रहेगा।

न्यायालय ने कहा कि नगर निगम आगरा ने अपने शपथ पत्र में 23 अनटेप्ड नालों के टैपिंग कार्य को अप्रैल 2025 तक पूरा करने की बात कही थी, लेकिन उसके अनुपालन का कोई ब्यौरा नहीं है। इसको लेकर न्यायालय ने आदेश दिया कि इन 23 अनटेप्ड नालों का टैपिंग का कार्य 15 मई तक पूरा कर दिया जाए।

साथ ही अनुपालन आख्या अगले एक सप्ताह के अन्दर दाखिल कर दी जाए। इसके अलावा शपथ पत्र में 6 अनटेप्ड नालों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार से शपथ पत्र की मांग की गई है। न्यायमित्र एडीएन राव द्वारा न्यायालय को यह इंगित किया गया कि इस कार्य को समाप्त करने के लिए डीपीआर में क्या समय सीमा है। तो न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 4 माह के अन्दर कार्य को समाप्त करना होगा।

38 नालों की टैपिंग अंतिम चरण
शहर के 38 अनटैप्ट नालों के संबंध में 2 साल से योजना एव्प्रुव नहीं हो पा रही है। यूपी जल निगम (अर्बन) द्वारा संशोधित डीपीआर प्रस्तुत की गई। जिसमें न्यायालय ने आदेश दिया है कि अगली एक्जीक्यूटिव बैठक में डीपीआर स्वीकृत कर दी जाए। जिसके बाद कार्य को तुरंत शुरू कर दिया जाए। इस संबंध में जल निगम अर्बन द्वारा कार्य समाप्त करने की समय सीमा एक माह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर बताने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि इसकी आखिरी तिथि किसी भी स्थिति में मिशन द्वारा स्वीकृति की दिनांक से 3 महीने से अधिक नहीं होगी। 38 अनटैप्ड परियोजना राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजी गयी है। इस संबंध में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा न्यायालय के समक्ष नोट प्रस्तुत किया गया था। 38 अनटैप्ड नालों में 176 करोड़ से अधिक खर्च होने की योजना है।

पर्यावरणविद अधिवक्ता केसी जैन का कहना
सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है। जिसमें यमुना में गिरने वाले सभी नालों की टैपिंग 4 माह में पूरी करने को कहा गया है। अब समय है कि नगर निगम और जल निगम बिना देरी किए इस पर अमल करें। यमुना हमारी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। यह आदेश यमुना को स्वच्छ और जीवंत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग रंग लेकर आएगी।

Latest articles

गौ संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य में आएगी ‘गौ सेवा नीति’— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में गौ संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा को...

टीईटी निर्णय के विरोध में शिक्षक-कर्मचारी एकजुट, 13 मार्च को जिलों में ज्ञापन

भोपाल मध्य प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी एवं पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीईटी परीक्षा को...

लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराने पर 6 निजी अस्पतालों को नोटिस — 31 मार्च के बाद संचालित पाए जाने पर होगी कार्रवाई

भोपाल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं...

कमला नगर में युवक ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

भोपाल राजधानी के कमला नगर थाना क्षेत्र स्थित मांडवा बस्ती में एक 24 वर्षीय युवक...

More like this

ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने मुजतबा खामेनेई

तेहरान। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को...

शाहबाज़ डिवीजन द्वारा “शौर्य रन का आयोजन

सागर भारतीय सेना के तत्वावधान में शाहबाज़ डिवीजन द्वारा "शौर्य रन 2026" थीम के...

एचईसी रांची के सीवीओ का अतिरिक्त प्रभार बीएचईएल के शिव पाल सिंह को

नई दिल्ली। भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय ने हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC), रांची...