नई दिल्ली,
क्या मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक 15 साल की मुस्लिम लड़की को भी शादी की इजाजत दी जा सकती है ? सुप्रीम कोर्ट इस पर विचार करेगा. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मसले पर विभिन्न हाई कोर्ट के अलग अलग फैसले आ रहे हैं. इसके चलते भ्रम की स्थिति बन रही है. इन फैसलों के खिलाफ अलग अलग याचिकाएं दाखिल हो रही है. बेहतर होगा कि सुप्रीम कोर्ट इससे जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर इस पर स्पष्टता दे.
CJI ने कहा- इस पर स्पष्टता की ज़रूरत है. हम जल्द इस पर विचार करेंगे. राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमे हाई कोर्ट ने 15 साल की मुस्लिम लडकी की शादी को वैध करार दिया था. दरअसल मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से यौन परिपक्वता ( puberty) की अवस्था में एक मुस्लिम लड़की शादी कर सकती है.
1973 में हुआ था बोर्ड का गठन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन 7-8 अप्रैल 1973 को हुआ था. ये बोर्ड ऐसे वक्त में बनाया गया था जब भारत सरकार समानांतर कानून के जरिए भारतीय मुसलमानों पर लागू होने वाले शरिया कानून को खत्म करने की कोशिश कर रही थी. इस दौरान दत्तक ग्रहण विधेयक संसद में पेश किया गया था. इस विधेयक को समान नागरिक संहिता की दिशा में पहला कदम कहा गया.
‘वक्फ बोर्ड की शक्तियों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं’
सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले 1995 के कानून में संशोधन के लिए संसद में विधेयक लाने की तैयारी के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा कि वक्फ बोर्ड की कानूनी स्थिति और शक्तियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने एनडीए के सहयोगी दलों और विपक्षी दलों से भी “ऐसे किसी भी कदम को पूरी तरह से खारिज करने” और संसद में ऐसे संशोधनों को पारित न होने देने का आग्रह किया है.
