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‘रिश्वत के बदले जमानत’ पर ट्रांसफर: जज के स्टाफ ने ‘साजिश’ का लगाया आरोप, सीबीआई जांच की मांग की

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नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामले की सुनवाई के बीच एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज का अचानक तबादला हो गया और उनके रिकॉर्ड कीपर के खिलाफ रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया गया। इस साजिश के आरोपों ने इस कहानी को रहस्यमयी मोड़ दे दिया है।

जज का तबादला
राऊज एवेन्यू कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज दीपावली शर्मा का अचानक तबादला कर दिया गया। यह तबादला तब हुआ, जब एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने उनके कोर्ट के अहलमद (रिकॉर्ड कीपर) मुकेश कुमार के खिलाफ रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया। क्या यह महज संयोग है, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश?

रिश्वतखोरी का आरोप: अहलमद पर ACB की नजर
एसीबी ने मुकेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा है कि उन्होंने जमानत दिलवाने के लिए मोटी रकम की मांग की और रिश्वत ली। 30 दिसंबर 2024 को एक GST अधिकारी के रिश्तेदार ने ACB को ईमेल के जरिए शिकायत की कि कोर्ट के अधिकारियों ने 85 लाख रुपये और अन्य आरोपियों के लिए 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। एक अन्य शिकायत में दावा किया गया कि मुकेश ने जनवरी 2025 में तीन आरोपियों की जमानत के लिए प्रति व्यक्ति 15-20 लाख रुपये की मांग की थी।

ACB की जांच में एक आरोपी, विशाल कुमार, को गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसने मुकेश को 40 लाख रुपये देकर अपनी अंतरिम और नियमित जमानत हासिल की। विशाल ने यह भी बताया कि उसने अन्य आरोपियों, जैसे राज सिंह सैनी (85 लाख रुपये), ललित कुमार (15 लाख रुपये), और अन्य के लिए रिश्वत के लेन-देन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

साजिश का दावा
मुकेश कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने और स्पेशल जज के खिलाफ साजिश करार दिया। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। मुकेश का कहना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है, और सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनकी अग्रिम जमानत याचिका को 22 मई को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि उनकी हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि रिश्वत की रकम और अन्य सह-आरोपियों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

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