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जब भारत में ‘हाईजैक’हुई थी ट्रेन! जानें उस दिन की कहानी जब राजधानी एक्सप्रेस के यात्रियों की अटक गई थीं सांसें

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नई दिल्ली:

पाकिस्तान में एक यात्री ट्रेन ‘जाफर एक्सप्रेस’ को हाईजैक किए जाने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सुरंग में इस ट्रेन को रोक रखा है और सैकड़ों यात्रियों को बंधक बनाए हुए हैं। यह ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी। इस ट्रेन में पाकिस्तानी सेना के जवान और अन्य सुरक्षाकर्मी भी सवार थे, जो छुट्टी पर अपने घर जा रहे थे। जिस तरह से इस ट्रेन को हाईजैक किया गया उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही। लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसी ही एक वारदात आज से करीब 16 साल पहले भारत में भी हुई थी, जब नक्सलियों ने यात्रियों से भरी राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर सनसनी फैला दी थी।

2009 में जब झारखंड में हाईजैक हुई ट्रेन!
सन्न करने देने वाली ये घटना 27 अक्टूबर 2009 को हुई थी। नक्सलियों ने पश्चिम मिदनापुर जिले के बांस्तला रेलवे स्टेशन पर नई दिल्ली जाने वाली भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस को रोक लिया था। लगभग 300-400 नक्सली समर्थकों ने इस अपहरण को अंजाम दिया था। उनकी मांग थी कि उनके नेता छत्रधर महतो को रिहा किया जाए।

सैकड़ों नक्सलियों ने रोक ली थी ट्रेन
छत्रधर महतो उस समय एक अलग मामले में जेल में बंद था। लगभग 20 राज्य पुलिस कर्मियों और 150 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों के हस्तक्षेप के बाद ट्रेन को छोड़ा गया। ड्राइवर और यात्री पूरी तरह से सुरक्षित थे। यह घटना देर रात एक बजे के बाद हुई और करीब 4 घंटे बाद खत्म हुई। यह घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।

सरकार ने नहीं मानी नक्सलियों की बात
भाकपा माओवादी संगठन ने झारखंड और बिहार में बंद बुलाया था। इसी दौरान नक्सलियों ने इस ट्रेन पर पथराव कर रोक दिया और चालक दल को बंधक बना लिया। नक्सलियों ने उस समय PCPA (माओवादियों द्वारा समर्थित पीपुल्स कमिटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसिटीज) के प्रवक्ता छत्रधर महतो की रिहाई की मांग की थी।

माओवादियों की डिमांड को उस समय की रेल मंत्री ममता बनर्जी ने अस्वीकार कर दिया था। सरकार नक्सलियों और माओवादियों से बातचीत के मूड में नहीं थी। हालांकि, नक्सलियों ने भी अपना खौफ पैदा करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं। ट्रेन के डिब्बों में घुसने की कोशिश की। उन्होंने ट्रेन के इंजन और कुछ डिब्बों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था।

करीब 4 घंटे बाद ट्रेन छोड़ भागे नक्सली
नक्सलियों ने यात्रियों को ये आश्वासन दिया कि वे उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। वो सरकार के प्रति अपने गुस्से का इजहार करने के लिए ये कदम उठा रहे। हालांकि, सरकार ने नक्सलियों की बात नहीं मानी इस दौरान आरपीएफ और पुलिस फोर्स घटना वाली जगह पर पहुंचने लगी थी। हालांकि, पुलिस फोर्स और आरपीएफ के पहुंचने से पहले ही नक्सली जंगल के रास्ते वहां से निकल गए थे। ये पूरा बंधक कांड चार घंटे चला था। इस घटना के बाद भारत में ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर खास कदम उठाए गए। खास तौर से नक्सल प्रभावित इलाकों में कई जरूरी कदम उठाए गए।

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