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Tuesday, April 28, 2026
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किन मुस्लिम देशों में UCC जैसे कानून पहले से हैं? भारत में इसके विरोध के पीछे क्या है तर्क

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नई दिल्ली

समान नागरिक संहिता (UCC) यानी एक देश एक कानून। पीएम मोदी ने मंगलवार भोपाल में यूसीसी का जिक्र किया जिसके बाद इसको लेकर बहस छिड़ी है। यूसीसी के तहत देश में रहने वाले सभी धर्मों के लिए एक कानून होगा। फिलहाल भारत में ऐसा नहीं है और चर्चा है कि केंद्र सरकार जल्द इस दिशा में आगे बढ़ सकती है। इसके लागू होते ही विवाह, संपत्ति का बंटवारा, बच्चा गोद लेना और तलाक जैसे विषयों पर एक कानून होगा। यहां धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून है। भारत से पहले भी दुनिया के कई देश हैं जहां यूसीसी जैसे कानून पहले से ही लागू हैं। इनमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं।

समान नागरिक संहिता को मानने वाले मुस्लिम देशों की लंबी सूची है। इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किए, इंडोनेशिया और मिस्र जैसे देश शामिल हैं जो समान नागरिक संहिता को मानते हैं। इन देशों में किसी विशेष धर्म या समुदाय के लिए अलग कानून नहीं है। सभी लोगों के लिए एक समान कानून है। इसके अलावा अमेरिका, आयरलैंड और दूसरे भी कई देश हैं जहां यह कानून लागू है। इस्लामिक देश सरिया कानून को मानते हैं और यहां अलग कानून नहीं है। सभी व्यक्तियों पर एक समान कानून लागू होता है।

पीएम मोदी की ओर से समान नागरिक संहिता का जिक्र करते ही भारत में इसको लेकर नई बहस छिड़ गई है। पीएम मोदीने कहा कि विपक्षी दल यूसीसी के मुद्दे पर मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं। तीन तलाक और चार-चार शादियों जैसी कुरीतियां समाप्त होनी चाहिए। भारत में तो ट्रिपल तलाक को अभी बैन किया गया लेकिन कई मुस्लिम देशों में इस पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। बांग्लादेश, मलेशिया, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, इडोनेशिया, कुवैत जैसे मुस्लिम देशों ने इस पर बहुत पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है।

कई मुस्लिम देश जहां कई शादियों पर रोक है इनमें तुर्किए प्रमुख है। इसके अलावा इराक, सीरिया, मिस्र, मोरोक्को, पाकिस्तान और बांग्लादेश में दूसरी शादी कोर्ट के अधीन है। ईरान और पाकिस्तान जैसे देश में यदि कोई दूसरी शादी करना चाहता है तो उसे अपनी पहली पत्नी से इजाजत लेनी होती है इतना ही नहीं पहली पत्नी की सहमति का सबूत कोर्ट में दिखाना होता है। वहीं मलेशिया में निकाह के लिए पत्नी के साथ सरकारी एजेंसी की भी मंजूरी होनी चाहिए।

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