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भागवत से मुलाकात कर चर्चा में आए मौलाना उमेर इलियासी कौन हैं ?

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नई दिल्ली

मौलाना उमेर इलियासी कौन हैं ? आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की गुरुवार को उमेर अहमद इलियासी से मुलाकात के बाद उनके बारे में जानने वालों की तादाद चक्रवृद्धि ब्याज की तरह से बढ़ी है। ऑल इंडिया मुस्लिम इमाम ऑर्गेनाइजेशन के सदर मौलाना उमेर अहमद इलियासी इंडिया गेट से लगभग सटी गोल मस्जिद के इमाम हैं। वह इस्लाम के विद्वान तो हैं ही। बड़ी बात ये है कि उन्होंने अन्य धर्मों का भी गहन अध्ययन किया हुआ है। उनके जीवन का अटूट हिस्सा है सर्वधर्म समभाव। मोहन भागवत के गोल मस्जिद में आने पर हैरान होने वालों को शायद मालूम ना हो कि इसी मस्जिद में इंदिरा गांधी उस दौर में भी आती थीं जब वह देश की प्रधानमंत्री थीं। तब इस मस्जिद के इमाम मौलाना जमील इलियासी थे। वे मौलाना उमेर अहमद इलियासी के वालिद थे। उन्हें इंडिया गेट का फकीर भी कहा जाता था।

​कृष्ण के वंशज मौलाना इलियासी!
मौलाना उमेर इलियासी कहते हैं कि उनके पुरखे हिन्दू थे। वे तो यहां तक कहते हैं कि वे भगवान कृष्ण के वंशज हैं। उनका परिवार करीब दो-ढाई सौ साल पहले इस्लाम स्वीकार कर चुका है। वे मानते हैं कि इस्लाम का रास्ता सच्चाई, अमन और भाई चारे की तरफ लेकर जाता है। इस्लाम में किसी के लिए कोई नफरत का भाव नहीं है। मौलाना उमेर इलियासी की स्कूली शिक्षा पंडारा रोड के सरकारी स्कूल में हुई। वे स्कूली दिनों में क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी थे। उम्र बढ़ी तो उनका रास्ता बदल गया। पिता मौलाना जमील इलियासी ने उन्हें अपने साथ जोड़ लिया।

​गांधी से प्रभावित मौलाना
मौलाना उमेर इलियासी की शख्सियत पर महात्मा गांधी का असर साफ दिखाई देता है। वे कहते हैं कि गांधी जी उनके गुरुग्राम के गांव घसेरा के पुश्तैनी घर में 19 अगस्त, 1947 को आए थे। वहां पर उनका मौलाना उमेर के दादा चौधरी मुनीरउद्दीन साहब और सैकड़ों लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया था। गांधी जी ने गांवों वालों को हिदायत दी थी कि वे पाकिस्तान नहीं जाएंगे। गांव वालों ने उनकी बात मानी थी। मौलाना उमेर इलियासी राजघाट में होने वाले सर्वधर्म सम्मेलनों में लगातार पहंचते हैं। बहुत प्रखर वक्ता हैं। वे जब कुरआन के साथ गीता और बाइबल से भी उदाहरण देकर अपनी बात रखते हैं तो श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मुस्कराते हुए कहते हैं कि वे तो सबसे मिलते हैं। मोहन भागवत जी से पहले भी मिल चुके हैं। मस्जिद सबके लिए है। यहां पर सबका स्वागत है। वे कहते हैं कि भारत में शांति के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं।

 

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