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मतदान का डेटा प्रकाशित होने में क्यों लग जाता है समय? जानिए चुनाव आयोग की क्या होती है पूरी प्रक्रिया

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नई दिल्ली,

लोकसभा चुनाव में दो चरणों का मतदान प्रतिशत और डेटा शेयर करने में हुई देरी पर जमकर राजनीति हो रही है. ऐसे में चुनाव आयोग ने तय किया है कि अगले चरणों के लिए अपनी टीम को और ज्यादा सतर्क कर दिया जाए. हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि अगले चरणों में मतदान की समय-सीमा खत्म होने के बाद आयोग प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया के जरिए देश को मतदान के आंकड़ों की अंतरिम यानी प्रोविजनल जानकारी देगा या नहीं. साल 2014 तक ये परिपाटी जारी थी. लेकिन 2019 और 2024 में हुए दो चरणों में इस पर अमल नहीं हुआ है.

चुनाव आयोग ने बुधवार को हुई बैठक में ये भी तय किया कि आगामी चरणों में वोटिंग डेटा वेरिफिकेशन और रिलीज करने की रफ्तार बढ़ा दी जाए. सूत्रों के मुताबिक, मतदान का डेटा हासिल करने की प्रक्रिया तय है. इसके पांच चरण होते हैं. बूथ, सेक्टर, जिला निर्वाचन अधिकारी यानी रिटर्निंग अफसर, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ और फिर केंद्रीय इकाई भारत का निर्वाचन आयोग. मतदान के आंकड़े एक तय फॉर्मेट में भेजे जाते हैं, जिसे फॉर्म 17C कहा जाता है. इसी के तय कॉलम में भरकर उस समय तक की जानकारी निश्चित समय अंतराल पर भेजी जाती है.

डेटा फॉर्म में दी जाती हैं सारी जानकारियां
मतदान के दिन बूथ वाले प्रिजाइडिंग अफसर यानी बूथ इंचार्ज दोपहर बाद एक बजे, फिर मतदान खत्म होने के बाद अमूमन शाम सात बजे तक अपने यहां मतदाता सूची में कुल मतदाता संख्या, डाले गए कुल वोट, पुरुष महिला और तीसरे दर्जे के मतदाताओं का डेटा फॉर्म 17C में भरकर अपने-अपने सेक्टर के इंचार्ज को देते हैं. इस फॉर्म में मतदान के दौरान हुई हरेक छोटी बड़ी घटना की तफसील दर्ज होती है. ईवीएम में कभी गड़बड़ हुई, किसी मतदाता ने शिकायत दर्ज कराई, कोई कहासुनी हुई, मतदान किसी भी वजह से रुका… ये सारी जानकारियां दर्ज होती हैं.

चुनाव आयोग को भेजा जाता है फाइनल डेटा
अलग-अलग सेक्टर में वेरिफाई होकर ये डेटा जिला निर्वाचन अधिकारी यानी रिटर्निंग अफसर से होते हुए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ के दफ्तर तक पहुंचता है. सीईओ के दफ्तर में भी विशेषज्ञों की टीम सभी डिटेल्स को वेरिफाई करती है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ या मानवीय चूक की कोई गुंजाइश न रहे. फिर फाइनल डेटा निर्वाचन आयोग को भेजा जाता है. ये प्रक्रिया बूथ स्तर पर दोपहर एक बजे, फिर मतदान खत्म होने के बाद भेजा जाता है.

आयोग तक डेटा आने में लग जाते हैं 36 घंटे
अगर कहीं देर शाम तक मतदान चलता है या फिर दुर्गम जगह बूथ है तो कई बार अगले दिन सुबह सात आठ बजे तक भी आंकड़े आने का दौर जारी रहता है. ऐसे में आयोग मुख्यालय तक आंकड़े पहुंचने में मतदान खत्म होने के बाद भी 36 घंटे तक लग जाते हैं. हालांकि, अब उठे विवाद के बाद आयोग ने एहतियाती उपाय करते हुए इस प्रक्रिया पर प्रभावी, शीघ्र और सटीक ढंग से काम करने के लिए चुनावी तंत्र को सतर्क रहने को कहा है. आने वाले पांच चरणों के मतदान में उम्मीद है कि आंकड़े समय से ही मिलते रहेंगे, ताकि किसी को चुनावी प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर उंगली उठाने का मौका ना मिले.

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