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Monday, June 15, 2026
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वक्फ बिल पेश होने से पहले एक्टिव हो गए बीजेपी के ‘चाणक्य’, जानें किस रणनीति पर चल रही सरकार

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नई दिल्ली

सरकार लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पेश करने जा रही है। सरकार मंशा लोकसभा से इसे पारित कराने की है। संसद की एक संयुक्त समिति की रिपोर्ट के बाद संशोधित किए गए वक्फ विधेयक को लोकसभा में विचार और पारित किए जाने के प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार की तरफ से इस बिल को पारित कराने की जिम्मेदारी खुद पार्टी के चाणक्य अमित शाह ने उठाई है। अमित शाह बिल के पेश होने से पहले एक्टिव हो गए हैं। हालांकि, सबकी नजर मुस्लिम समुदाय में मजबूत पैठ रखने वाले एनडीए के दो सहयोगी दलों के रुख पर लगी हुई है।

जेडीयू सांसदों से मिले अमित शाह
वक्फ संशोधन बिल को लेकर अमित शाह एनडीए के सहयोगी और बिहार में सरकार के साझेदार जदयू को साधने में जुट गए। शाह ने ललन सिंह और संजय झां के साथ बैठक की। बैठक में शाह ने जदयू सांसदों के साथ वक्फ संशोधन बिल को लेकर चर्चा की। बिहार में बीजेपी की अहम सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी ने भी वक्फ बिल को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। वक्फ संशोधन बिल को लेकर लोजपा सांसद ने कहा कि अभी बिल को लेकर अभी तक संसद में चर्चा नहीं हुई है लेकिन विपक्ष बिल को लेकर भ्रम फैला रहा है।

टीडीपी का मिलेगा समर्थन, संशय बरक़रार
एनडीए की एक और अहम सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी ने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने का फैसला किया है। टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने मंगलवार को कहा कि पार्टी वक्फ (संशोधन) विधेयक के समर्थन में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं।

बिल के बारे में बोलते हुए प्रेम कुमार जैन ने कहा कि पूरा मुस्लिम समुदाय वक्फ संशोधन विधेयक के पेश होने का इंतजार कर रहा है…हमारी पार्टी इसका समर्थन करेगी। चंद्रबाबू नायडू पहले ही कह चुके हैं कि हम मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए काम करेंगे। कल बिल पेश किया जाएगा, उसके बाद ही हम इस पर कोई टिप्पणी करेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं।

आईयूएमएल करेगी विरोध
आईयूएमएल ने संसद में पेश होने जा रहे वक्फ संशोधन बिल का विरोध किया है। इस मामले में आईयूएमएल सांसद ई. टी. मोहम्मद बशीर ने वक्फ संशोधन बिल को ‘असंवैधानिक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल को सदन में पेश किया जाएगा तो हम इसका विरोध करेंगे। क्योंकि इस बिल के माध्यम से वक्फ की जमीनों को छीनने की कोशिश की जाएगी।

आईयूएमएल सांसद ने कहा कि बिल को लेकर जेपीसी बनी। जेपीसी के ही कुछ सदस्यों ने इस बात का खुलासा किया है कि उनकी बातों को नहीं सुना गया। यह बिल पूर्ण रूप से असंवैधानिक है और देश के लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। अगर यह बिल संसद में दोबारा लाया जाता है, तो हम इसका विरोध करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का इस बिल के माध्यम से वक्फ की जमीनों पर कब्जा करने का एजेंडा है।

लोकसभा, राज्यसभा का नंबर गेम
वक्फ संशोधन बिल पेश करने के साथ ही सरकार ने विपक्ष को किनारे करने की रणनीति भी बना ली है। बिल को पारित कराने को लेकर सरकार के पास संसद में संख्या बल पर्याप्त संख्या बल है। लोकसभा में 542 सांसदों में एनडीए के पास 293 सांसद हैं। वहीं, बिल को पारित कराने को लेकर सरकार को 272 सांसदों के समर्थन की ही जरूरत है। वहीं, इंडिया दल के सहयोगियों की सभी सीटों को मिला दे तो भी यह आंकड़ा सिर्फ 233 तक ही पहुंचता है।

राज्यसभा में नंबर गणित सरकार के पक्ष में है। राज्यसभा में इस समय 236 सदस्य हैं। बीजेपी के सांसदों की संख्या 98 है। एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 115 के करीब है। छह मनोनीत सदस्यों को मिलाने से यह आंकड़ा 121 पहुंच जाता है। वहीं, इस बिल को पारित करने के लिए 119 सांसद की जरूरत है।

पिछले साल संसदीय समिति को भेजा था विधेयक
पिछले साल विधेयक पेश करते समय सरकार ने इसे दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव किया था। समिति की तरफ से रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसकी अनुशंसा के आधार पर मूल विधेयक में कुछ बदलावों को मंजूरी दी थी। विपक्षी दल इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ बता रहे हैं। कई प्रमुख मुस्लिम संगठन इस विधेयक के खिलाफ समर्थन जुटा रहे हैं।

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