नई दिल्ली
दो दशक का समय लंबा होता है। यह तब महसूस होता है जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं। पिछले 20 साल के लिए भी यही बात कही जा सकती है। इस दौरान दुनियाभर में तमाम सरकारें आई-गईं। तख्तापलट हुए। सरकारों में भूमिकाएं बदलीं। एक की दूसरे ने जगह ली। कुछ हमारे बीच नहीं रह गए। यह तस्वीर भी उसी की बानगी है। इसमें सबकुछ बदल गया है। यह 2001 की है। तब देश की कमान अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में थी। वह प्रधानमंत्री थे। देश के मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी उन दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री होते थे। पीछे खड़े जसवंत सिंह रक्षा मंत्री होते थे। इस तस्वीर में सबकुछ बदल चुका है। सिर्फ नहीं बदले हैं तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन । वह तब भी रूस के सर्वोच्च नेता थे और आज भी हैं। पुतिन तब भी भारत के उतने ही अच्छे दोस्त थे जितने आज हैं।
यह तस्वीर नवंबर 2001 की है। तब वाजपेयी की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने मॉस्को गया था। नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल थे। तब जसवंत सिंह रक्षा मंत्री थे। वह भी इस टोली का हिस्सा थे। तब पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुतिन से मिलने का मौका मिला था। मॉस्को में अटल बिहारी वाजपेयी की मौजूदगी में उनकी मुलाकात पुतिन से हुई थी।
पुतिन ने मोदी का किया था गर्मजोशी से स्वागत
पुतिन तब भी भारत का बहुत सम्मान करते थे। उनका व्यवहार अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी दोस्त जैसा था। उस समय भले नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे, लेकिन पुतिन ने पूरी गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया था। मोदी को पुतिन ने एक बार भी एहसास नहीं होने दिया कि उनका महत्व कुछ कम है।
आज अटल बिहारी वाजपेयी हमारे बीच में नहीं हैं। उनका 16 अगस्त 2018 को निधन हो गया था। जसवंत सिंह ने भी 27 सितंबर 2020 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। 2001 में गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी आज भारत के प्रधानमंत्री हैं। एक पुतिन ही हैं जो जैसे थे वैसे ही हैं।
रूस से नहीं बदले भारत के संबंध
भारत और रूस के शानदार संबंधों को उनके कार्यकाल में नई ऊंचाइयां मिलीं। हर मुश्किल समय में भारत को रूस का साथ मिला। परमाणु परीक्षण के बाद जब पूरी दुनिया ने भारत से मुंह फेर लिया था तब भी रूस उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा था। भारत ने भी रूस के साथ वही किया। यूक्रेन पर हमले के बाद जब पूरी दुनिया रूस को कसूरवार ठहराने में जुट गई तो हमने इससे दूरी बनाई। इन दो दशकों में भारत के अमेरिका और यूरोप के साथ भी संबंध बेहद अच्छे हुए हैं। लेकिन, उसने अपने पुराने दोस्त को दगा नहीं दिया। व्लादिमीर पुतिन पूर्व में इंटेलिजेंस ऑफिसर थे। उन्होंने केजीबी फॉरेन इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर 16 साल काम किया है। राष्ट्रपति के तौर पर उनका पहला कार्यकाल 2000 से 2008 तक था। फिर 2012 से वह अब तक रूस के राष्ट्रपति हैं।
