मोदी सरकार के लिए वक्फ संशोधन बिल को राज्यसभा से पारित कराने की राह अब आसान होती नजर आ रही है. क्योंकि एनडीए के पुराने सहयोगी बीजू जनता दल (बीजेडी) ने यू-टर्न ले लिया है. पहले बीजेडी ने वक्फ बिल का विरोध करने की बात कही थी, और अपने सांसदों को वक्फ बिल के खिलाफ वोट देने के लिए कहा था, लेकिन अब पार्टी ने अपने सांसदों को इस मुद्दे पर स्वतंत्र रूप से वोट देने की छूट दे दी है.
बीजेडी ने राज्यसभा में अपने सांसदों के लिए कोई व्हिप जारी नहीं किया है और न ही कोई खास निर्देश दिया है. पार्टी के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. पहले यह माना जा रहा था कि कभी बीजेपी की सहयोगी रही बीजेडी इस बिल के खिलाफ वोट कर सकती है. लेकिन अब सांसदों को स्वतंत्रता देने के फैसले ने एनडीए के लिए संख्याबल का खेल आसान कर दिया है. बीजेडी के सांसद बीजेपी के साथ अक्सर खड़े रहे हैं. लेकिन ओडिशा में बीजेपी की बढ़ती ताकत की वजह से बीजेडी और बीजेपी की राहें अलग हो गई थीं. इसके बाद बीजेडी के सांसद संसद में भी कांग्रेस और इंडिया अलायंस के नेताओं के साथ नजर आए थे.
एनडीए को ‘पुराने दोस्त’ का साथ
राज्यसभा में एनडीए के पास 119 सांसद हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 118 से सिर्फ एक ज्यादा है. बीजेडी के पास 7 सांसद हैं, और अगर ये सभी बिल के खिलाफ वोट करते, तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती थी. लेकिन अब बीजेडी सांसदों के स्वतंत्र वोटिंग के फैसले से यह संभावना बढ़ गई है कि कुछ सांसद बिल के पक्ष में जा सकते हैं या कम से कम वोटिंग से दूर रह सकते हैं. इसे एनडीए के लिए ‘पुराने दोस्त’ बीजेडी की ओर से अप्रत्यक्ष मदद के तौर पर देखा जा रहा है.
वक्फ बिल पर बीजेडी का यू-टर्न
बीजेडी के प्रवक्ता सस्मित पात्रा ने कहा, बीजू जनता दल ने हमेशा धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के सिद्धांतों को कायम रखा है, तथा सभी समुदायों के अधिकारों को सुनिश्चित किया है. हम वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के बारे में अल्पसंख्यक समुदायों के विभिन्न वर्गों द्वारा व्यक्त की गई विविध भावनाओं का गहराई से सम्मान करते हैं. हमारी पार्टी ने इन विचारों पर सावधानीपूर्वक विचार करते हुए, राज्य सभा में हमारे माननीय सदस्यों को न्याय, सद्भाव और सभी समुदायों के अधिकारों के सर्वोत्तम हित में अपने विवेक का प्रयोग करने की जिम्मेदारी सौंपी है, यदि विधेयक मतदान के लिए आता है. पार्टी का कोई व्हिप नहीं है.
विपक्ष की रणनीति पर सवाल
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है. कांग्रेस, सपा और AIMIM जैसे दलों ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया है. लेकिन बीजेडी के इस बदले रुख ने विपक्ष की उम्मीदों को झटका दिया है. विपक्ष को लग रहा था कि बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे गैर-गठबंधन दलों के समर्थन से वे बिल को रोक सकते हैं. अब बीजेडी के तटस्थ रुख ने उनकी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सोशल मीडिया यूजर्स ने मारा ताना
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इसे लेकर कुछ लोग इसे बीजेडी की ‘रणनीतिक चाल’ बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यह ओडिशा में बीजेपी के साथ पुरानी दोस्ती का नतीजा है. एक यूजर ने लिखा, बीजेडी का यह फैसला दिखाता है कि राजनीति में सिद्धांत कम, गणित ज्यादा मायने रखता है. लोग इंडिया अलायंस के नेताओं पर ताना भी मार रहे हैं. कह रहे हैं कि वे अपना घर तो बचा नहीं सकते, बीजेपी जैसी ताकतवर पार्टी से कैसे लड़ेंगे.
