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कभी डेढ़ लाख अब सिर्फ घाटी में बचे हैं 6,514 कश्मीरी पंडित, सरकार के जवाब के बाद भी कई सवाल

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नई दिल्ली

कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन का मुद्दा काफी वर्षों से चला आ रहा है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि दोबारा से उनकी घाटी में वापसी हो। हालांकि वर्तमान समय में वहां रह रहे कश्मीरी पंडितों की जो संख्या है उसे देखकर कई सवाल खड़े होते हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार राज्यसभा में बताया कि इस साल किसी भी कश्मीरी पंडित का घाटी से पलायन नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर उनकी ओर से यह भी बताया गया कि वर्तमान समय में घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों की संख्या 6 हजार 514 है। एक वक्त 90 से पहले घाटी में कश्मीरी पंडितों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक थी।

कश्मीरी पंडितों का पलायन
1990 में घाटी से कश्मीरी पंडितों का सबसे अधिक पलायन हुआ। सरकारी आंकड़े के मुताबिक इस साल यानी 1990 में 219 कश्मीरी पंडित हमले में मारे गए थे जिसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों का पलायन शुरू हुआ। एक अनुमान के मुताबिक जनवरी और मार्च 1990 के बीच 1 लाख 40 हजार से अधिक कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर जाने को मजबूर हुए। 2011 में सरकार के अनुमान के मुताबिक घाटी में करीब 2700 से 3400 पंडित थे। कश्‍मीरी पंडित संघर्ष समिति के अनुसार, जनवरी 1990 में घाटी के भीतर 75,343 परिवार थे। 1990 और 1992 के बीच 70,000 से ज्‍यादा परिवारों ने घाटी को छोड़ दिया। 1941 में कश्‍मीरी हिंदुओं का आबादी में हिस्‍सा 15% था और 1991 आते- आते हिस्सेदारी आधे प्रतिशत से भी कम हो गई।

370 खत्म होने के बाद घाटी में वापसी की जगी उम्मीद
पिछले 32 साल में कश्‍मीरी पंडितों को वापस घाटी में बसाने की कोशिशें हुईं, मगर नतीजा वैसा नहीं आया है। 5 अगस्‍त, 2019 को जब मोदी सरकार ने जम्‍मू और कश्‍मीर का विशेष दर्जा खत्‍म किया तो कश्‍मीरी पंडित बेहद खुश थे। वापसी की उम्मीद जगी। सरकार की प्राथमिकता में घाटी को आतंकवाद से मुक्त करना था और जल्द से जल्द कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का काम पूरा करना था। कश्मीरी पंडितों को लेकर मोदी सरकार की ओर कई योजनाओं का ऐलान किया गया। साल 2017 से 2022 के बीच 5 साल में 610 कश्मीरी पंडितों को उनके कश्मीर स्थित घर लौटाए जा चुके हैं। गृहमंत्रालय के अनुसार 2019 के बाद कश्मीरी पंडितों को दोबारा बसाने के काम में तेजी लाई गई है। सरकारी नौकरी के साथ ही आवास की सुविधा मुहैया कराई जा रही है।

घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों की संख्या 6,514
केंद्र सरकार की ओर से संसद में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और आतंकवादी हमलों में भी काफी कमी आई है। हालांकि इस राज्य में 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद 118 आम नागरिकों मारे गए हैं, जिनमें पांच कश्मीरी पंडित और 16 अन्य हिन्दू व सिख समुदाय के थे। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने यह भी कहा कि जम्मू एवं कश्मीर सरकार के विभिन्न विभागों में 5502 कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के दौरान कोई भी कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी छोड़कर नहीं गया है। अभी घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों की संख्या 6,514 है।

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