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बेबाकी या बेवकूफी? बीजेपी के लिए ही सिरदर्द बन गईं कंगना रनौत, एक महीने में दूसरी बार कराई किरकिरी

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नई दिल्ली

बॉलीवुड ‘क्वीन’ और मंडी से बीजेपी की सांसद कंगना रनौत बीजेपी के लिए ही मुसीबत बनती जा रही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन पर दांव खेला था और सिल्वर स्क्रीन की ये मल्लिका निराश भी नहीं की। जीतकर संसद भी पहुंच गईं। लेकिन अब उनकी बेबाकी और हर मुद्दे पर बोलने की आदत बीजेपी का सिरदर्द बढ़ा रही है। पार्टी ने रद्द किए जा चुके तीन कृषि कानूनों को वापस लाने की जरूरत से जुड़े उनके बयान से किनारा कर लिया है। अब कंगना भी अपने बयान को निजी बता रही हैं। खेद जता रही हैं। शब्द वापस ले रही हैं।

एक महीने में दूसरी बार पार्टी को किया असहज
पिछले एक महीने में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब बीजेपी ने कंगना रनौत के बयानों से दूरी बनाई है। मंडी सांसद अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं। बीजेपी में शामिल होने और सांसद बनने से पहले वह अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में रहा करती थीं। कई बार बड़बोलेपन की भी वजह से। अब मैडम सांसद बन गईं लेकिन हर मुद्दे पर बेबाकी से राय की उनकी आदत नहीं गई। नतीजा ये हो रहा कि बीजेपी को जब-तब असहज कर रही हैं।

पिछली बार उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन को भारत में ‘बांग्लादेश की तरह सत्तापरिवर्तन’ की साजिश करार दिया था। आंदोलन के दौरान रेप और हत्या के आरोप लगाए। आरोप सही भी थे। लेकिन विपक्षी दलों और किसान संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद बीजेपी ने न सिर्फ उनके बयान से किनारा कर लिया था बल्कि उन्हें सोच-समझकर बोलने की नसीहत भी दी थी। लेकिन कंगना तो कंगना हैं। वह भूल गईं कि अब वह सियासत में हैं जहां कई बार ‘कड़वा सच’ बोलना भी अपराध हो सकता है। बेबाकी भी बेवकूफी हो सकती है। जिस पार्टी ने खुद को कंगना के कहे ‘कड़वे सच’ से दूर कर लिया, वह अपने शीर्ष नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए फैसले को पलटने की बात करने को कैसे बर्दाश्त कर सकती थी

अब क्या कहा था कंगना ने
दरअसल, मंगलवार को कंगना ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के लिए फायदेमंद थे, और उन्हें फिर से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में किसान समूहों के विरोध के कारण सरकार ने कानूनों को रद्द कर दिया था। उन्हें पता था कि बयान पर विवाद होगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि यह बयान विवादित हो सकता है, लेकिन तीन कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए। किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए।’ उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी भलाई के लिए रद्द हो चुके तीनों कृषि कानूनों को वापस लाए जाने की मांग करें।

बीजेपी ने अपनी ही सांसद के बयान की निंदा की
कंगना के इस बयान से बीजेपी इतनी विचलित हो गई कि उसे अपने ही सांसद की कही बातों की निंदा करनी पड़ी। आनन-फानन में पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, बीजेपी सांसद कंगना रनौत का केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए गए कृषि बिलों पर बयान वायरल हो रहा है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह बयान उनका निजी बयान है। कंगना रनौत बीजेपी की तरफ से ऐसा कोई बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं, और यह कृषि बिलों पर बीजेपी के विचार को नहीं दर्शाता है। हम इस बयान की निंदा करते हैं।’

खेद है, शब्द वापस लेती हूं: कंगना
बीजेपी के पल्ला झाड़ने के बाद कंगना रनौत ने न सिर्फ अपने बयान को निजी बताया है, बल्कि खेद भी जताया है। उन्होंने कहा कि उनका बयान उनकी निजी राय है। उन्हें अपने बयान पर खेद है और अपने शब्दों को वापस ले रही हैं।

कंगना ने ‘कड़वा सच’ कह कर दी ‘बेवकूफी’
पिछली बार तो कंगना रनौत ने ‘कड़वा सच’ कहा था, क्योंकि किसान आंदोलन के दौरान मर्डर और रेप के आरोप गलत नहीं थे। पूरे देश ने देखा था कि कैसे राष्ट्रीय राजधानी के बॉर्डर पर एक दलित युवक को तालिबानी अंदाज में उल्टा लटकाकर तड़पा-तड़पाकर मारा गया था। पूरे देश ने देखा था कि कैसे किसान आंदोलन के दौरान एक आंदोलनकारी लड़की के साथ रेप के आरोप लगे। 25 साल की उस लड़की के पिता ने एफआईआर में कहा था कि दिल्ली से किसानों का एक दल पश्चिम बंगाल गया था जहां लड़की उनके संपर्क में आई। किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए वह उनके साथ ट्रेन से दिल्ली आ रही थी और उसी दौरान उसके साथ कथित तौर पर रेप हुआ। इस मामले में 6 के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। बाद में उस लड़की को कोरोना हो गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मामला जब सामने आया तो किसान नेताओं ने टिकरी बॉर्डर पर लगे आरोपियों के टेंट को हटवा दिया था।

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