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‘आरक्षण पर 50 फीसदी का आर्टिफिशियल बैरियर हटाकर रहेंगे’, कास्ट सेंसस में कांग्रेस को क्यों दिख रहा भविष्य!

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नई दिल्ली

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जाति आधारित जनगणना की एक बार फिर वकालत की है। उन्होंने बुधवार को कहा कि देश में यह कवायद होकर रहेगी और इस प्रक्रिया से दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों और आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय का पता चलेगा। जाति आधारित जनगणना का वास्तविक अर्थ न्याय है और उनकी पार्टी 50 फीसदी आरक्षण सीमा की दीवार को भी तोड़ेगी। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नागपुर में संविधान सम्मान सम्मेलन में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ये बातें कही। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया वो बेहद अहम है। इससे पहले उन्होंने तेलंगाना में भी जाति जनगणना पर आवाज बुलंद की।

तेलंगाना में कास्ट सेंसस के लिए प्रतिबद्ध- राहुल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक दिन पहले कहा कि वो तेलंगाना में जाति जनगणना कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो तेलंगाना को देश भर में जाति जनगणना के लिए एक मॉडल बनाएंगे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने भारत में जातिगत भेदभाव को अनोखा और दुनिया में सबसे बुरे में से एक बताया। वो देश में 50 प्रतिशत आरक्षण की बनावटी बाधा को ध्वस्त कर देंगे। भेदभाव की सीमा और प्रकृति का आकलन करने के लिए सबसे पहले जाति जनगणना की जानी चाहिए। इसलिए, मैं न केवल तेलंगाना में जाति जनगणना सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करूंगा कि तेलंगाना देश में जाति जनगणना के लिए एक मॉडल बने।

हरियाणा में हार के बाद क्या है कांग्रेस की रणनीति?
सवाल उठ रहे कि क्या कांग्रेस नेतृत्व को कास्ट सेंसस में भविष्य नजर आ रहा? जिस तरह से हरियाणा के चुनाव में पार्टी को शिकस्त मिली उसे देखते हुए कांग्रेस अब कोई गलती नहीं करना चाहती। ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। पार्टी को उम्मीद है कि आरक्षण और जातीय जनगणना के मुद्दे से पार्टी को फायदा हो सकता है। यही वजह है कि राहुल गांधी ने नागपुर में संबोधन के दौरान संविधान, आरक्षण और कास्ट सेंसस का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर की ओर से तैयार किया गया संविधान सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। उसी तरह जाति जनगणना विकास का प्रतिमान है। इससे स्पष्टता आएगी और नया प्रतिमान बनेगा।

कांग्रेस क्यों कर रही जातिगत जनगणना की पैरवी
राहुल गांधी यूं ही जातिगत जनगणना की पैरवी नहीं कर रहे। इस मुद्दे को लेकर वो सीधे तौर पर आरएसएस और बीजेपी को टारगेट करना चाहते हैं। यही वजह है कि नागपुर में संविधान सम्मान सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस अभी जातीय जनगणना को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि उन्हें क्या रुख अपनाना चाहिए। जाति जनगणना पर उन्हें क्या कहना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आरएसएस-बीजेपी कुछ भी कर लें, जातीय जनगणना होकर रहेगी। इस पर जो भी चर्चा करनी है कर लें। भारत की जनता ने तय कर लिया है कि जाति जनगणना होकर रहेगी और 50 फीसदी की दीवार टूटेगी। यह आवाज धीरे-धीरे बढ़ रही है। हमारा काम है कि हम लोगों को समझाएं कि जाति जनगणना से ही संविधान की रक्षा होगी।

राहुल गांधी के निशाने पर पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए रायबरेली सांसद ने कहा कि जब भी मैं जाति जनगणना की बात करता हूं, पीएम मोदी कहते हैं कि राहुल गांधी देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। हमें देश को बताना होगा कि हम देश के हाशिए पर पड़े 90 फीसदी से अधिक लोगों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि संविधान समानता, एक व्यक्ति-एक वोट, सभी के लिए और हर धर्म, जाति, राज्य तथा भाषा के लिए सम्मान की बात करता है। देश में निर्वाचन आयोग जैसे अनेक संस्थान संविधान की भेंट हैं। राजाओं और राजकुमारों के समय निर्वाचन आयोग नहीं होता था।

महाराष्ट्र-झारखंड चुनाव में कितना फायदा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी महाराष्ट्र और झारखंड चुनावों में संविधान की रक्षा और जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं। खास बात है कि इस बार राहुल मनुस्मृति की आलोचना भी कर रहे। हरियाणा में दलित वोटरों की नाराजगी से जो झटका लगा उसी को देखते हुए शायद कांग्रेस ने नई रणनीति बनाई है। पार्टी इस बार किसी भी कीमत पर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के वोटों को खोना नहीं चाहती है। यही वजह है कि पार्टी झारखंड और महाराष्ट्र में ‘संविधान सम्मान सम्मेलन’ कर रही। झारखंड में हुए इसी सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी ने मनुस्मृति को संविधान विरोधी पुस्तक बताया था। उन्होंने कहा कि संविधान और मनुस्मृति के बीच की लड़ाई वर्षों से चली आ रही है।

संविधान, आरक्षण, कास्ट सेंसस से बदलेगा चुनाव!
राहुल गांधी ने झारखंड में मनुस्मृति की आलोचना करते हुए दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के वोटों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने पाठ्यक्रम में आदिवासियों को जगह देने और 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को खत्म करने की बात भी कही थी। इस दौरान उन्होंने ओबीसी अधिकारियों का भी मुद्दा उठाया। अब कांग्रेस नेता ने महाराष्ट्र में कहा कि सम्मान जैसे शब्दों का खूब इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति भूख से मर रहा हो तो सम्मान का क्या मतलब है।

राहुल गांधी ने कहा कि बेहतर है कि उस व्यक्ति को पैसे और ताकत का इस्तेमाल करके सशक्त और सक्षम बनाया जाए, उसके बाद उसे आपके सम्मान की जरूरत नहीं होगी। कुल मिलाकर राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व महाराष्ट्र-झारखंड चुनाव में जिस रणनीति से आगे बढ़ रहे, पार्टी को लग रहा इससे जनता का सपोर्ट उनके लिए बढ़ेगा। हालांकि उनकी ये रणनीति कितनी सफल होगी ये दोनों राज्यों के चुनाव नतीजों से स्पष्ट होगा।

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