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Tuesday, June 2, 2026
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दिल्ली मेयर चुनाव में AAP ने BJP को क्यों दिया वॉकओवर, मैदान से पीछे हटने की इनसाइड स्टोरी

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नई दिल्ली:

दिल्ली नगर निगम (MCD) के लिए 25 अप्रैल को मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए सोमवार को नामांकन भरने का आखिरी दिन था। आम आदमी पार्टी (AAP) ने उसी दिन घोषणा कर दी कि वह इन पदों के लिए अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। AAP नेताओं का कहना है कि यह फैसला उन्होंने सोच-समझकर लिया है। वे किसी ऐसी लड़ाई में नहीं पड़ना चाहते थे जो बहुत मुश्किल हो और जिसमें हार-जीत का फैसला आखिरी समय तक न हो पाए। पार्टी नेताओं का दावा है कि वे लंबी रेस का घोड़ा बनना चाहते हैं। लेकिन, सूत्रों ने बताया है कि असल मामला पूरी तरह से अलग है, जिसके चलते अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने लड़ने की जगह समय रहते अपने कदम पीछे खींच लेने में ही भलाई समझी है।

15 से 20 पार्षद बदल सकते थे पाला-सूत्र
सूत्रों ने जानकारी दी है कि “आम आदमी पार्टी ने इसलिए मेयर चुनाव से कदम पीछे खींच लिए हैं, क्योंकि उसके 15 से 20 पार्षद चुनाव होने की स्थिति पाला बदल (भाजपा में जाने का संकेत) सकते थे। यही वजह है कि पार्टी ऐसी स्थिति आने ही नहीं देना चाहती थी कि उसे लेने के देने पड़ जाएं। वैसे भी आंकड़ों में बीजेपी भारी है और इसी वजह से आप ने चुनाव मैदान से भागे रहने में ही भलाई समझी है।”

पूरी तरह से बदल चुका है एमसीडी का गणित
आम आदमी पार्टी को मालूम है कि एमसीडी में दल-बदल कानून लागू नहीं होता। यही वजह है कि अलग-अलग पार्टियों के पार्षदों के दल बदलने से सदन की स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। इस समय आप के पास 113 पार्षद हैं, तो बीजेपी के पास 117 हैं। वहीं कांग्रेस के पास 8 पार्षद हैं। MCD के चुनाव दिसंबर 2022 में हुए थे। तब AAP को 250 में से 134 सीटें मिली थीं। BJP को 104 और कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं। बाकी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती थीं। मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल एक-एक साल का होता है। इनके लिए चुनाव 25 अप्रैल को होंगे।

आप को पहले ही लग गई थी भनक!
इससे पहले दिल्ली की पूर्व सीएम और आप नेता आतिशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनकी पार्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी। उन्होंने अपना डर कुछ इस तरह से जाहिर किया, ‘एमसीडी चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद भी BJP रुकी नहीं। उसने AAP के पार्षदों को तोड़ा और पिछले दरवाजे से जीतने की कोशिश की….. अगर हम मेयर का चुनाव जीतना चाहते, तो हमें भी हॉर्स ट्रेडिंग करनी पड़ती। लेकिन, हम ऐसी गंदी राजनीति को नहीं मानते।’

दिल्ली चुनाव की वजह से बदला समीकरण
आतिशी ने जो कुछ कहने की कोशिश की थी, उसका मतलब था कि AAP और BJP के पार्षदों की संख्या में बहुत कम अंतर है। उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर या किसी और तरीके से भाजपा से ज्यादा पार्षद जुटा सकती थी। पार्टी पहले भी ऐसा कर चुकी है। लेकिन, दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत से सारा समीकरण ही बदल चुका है।

मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में पार्षद तो वोट डालते ही हैं, साथ ही दिल्ली विधानसभा के 14 विधायक (MLA) भी वोट डालते हैं। इन MLA को पार्टियों की ताकत के हिसाब से स्पीकर नामित करते हैं। इसके अलावा, दिल्ली के 7 लोकसभा और 3 राज्यसभा सांसद भी वोट डालते हैं। AAP के पास तीनों राज्यसभा सीटें हैं, वहीं BJP के पास दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटें हैं। ऊपर से आप की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से खुन्नस खाई बैठी हैं। स्पीकर ने 14 में से 11 बीजेपी और 3 आप विधायकों को नामित कर रखा है।

पिछले मेयर चुनाव में अलग थी कहानी
पिछले मेयर चुनाव में कहानी पूरी तरह से अलग थी। इसलिए,तब AAP के 14 में से 13 MLA को मौका मिला था, क्योंकि पार्टी के विधायकों की संख्या 62 थी। अभी MCD की 11 सीटें खाली हैं। इनमें से 3 सीटें AAP ने जीती थीं और 8 सीटें BJP ने। इन सीटों पर पार्षद विधानसभा चुनाव जीतकर MLA बन गए हैं। लोकसभा चुनाव में BJP पार्षद कमलजीत सहरावत पश्चिमी दिल्ली से सांसद बन गई हैं। इसलिए, एक और सीट खाली हो गई है। इसलिए अभी कुल 139 पार्षद हैं।

राजा इकबाल सिंह है BJP के मेयर उम्मीदवार
BJP ने राजा इकबाल सिंह को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। वे अभी दिल्ली नगर निगम में विपक्ष के नेता हैं। जय भगवान यादव को डिप्टी मेयर पद का उम्मीदवार बनाया गया है। वे विपक्ष के डिप्टी लीडर हैं। कांग्रेस के पास सिर्फ 8 पार्षद हैं। फिर भी पार्टी ने मंदीप सिंह को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। आरीबा खान को डिप्टी मेयर पद का उम्मीदवार बनाया गया है।

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