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Tuesday, June 2, 2026
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क्या दिग्विजय सिंह बनाम शशि थरूर होगा कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव?

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नई दिल्ली,

कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव रोचक होता जा रहा है. दिग्विजय सिंह की चुनाव में एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. लेकिन अभी चुनाव को लेकर कई सवाल सामने हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं. जैसे क्या अब चुनाव शशि थरूर बनाम दिग्विजय सिंह होगा? या किसी और उम्मीदवार की भी चुनाव में एंट्री होगी. दूसरा सवाल यह है कि क्या दिग्विजय को खड़ा करना सिर्फ अशोक गहलोत के लिए संदेश भर तो नहीं है?

जानकार मानते हैं कि दिग्विजय सिंह के कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव में उतरने की वजह राजस्थान कांग्रेस में मचा घमासान भी हो सकता है. यह प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा हो सकता है. ताकि गहलोत पर दबाव बनाया जा सके कि वह सचिन पायलट से लड़ाई छोड़कर अध्यक्ष पद चुनाव की तरफ ध्यान दें.

दिग्विजय सिंह के चुनाव में उतरने के पीछे कई अन्य संदेश भी हैं. जैसे दिग्विजय चुनाव में उतरकर यह बताना चाहते हैं कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है और कोई भी चुनाव लड़ सकता है. खबरें ये भी हैं कि दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ेंगे लेकिन देशभर में अपना प्रचार करने नहीं जाएंगे. इसके उलट पर भारत जोड़ो यात्रा में अपने हिस्से की भूमिका अदा करेंगे.

राजस्थान संकट के बीच सीएम अशोक गहलोत को भी दिल्ली बुलाया गया है. यहां सोनिया गांधी से आज रात या कल सुबह गुरुवार को उनकी मुलाकात होनी है. राजस्थान में पार्टी के भीतर मचे बवाल से हाइकमान नाराज है. हाइकमान चाहता था कि गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ें और सीएम की गद्दी सचिन पायलट संभाल लें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. विधायकों के विद्रोह पर पार्टी ने एक्शन भी लिया है. गहलोत के तीन करीबियों को कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों ना हो.

कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने तीन विधायकों पर तो एक्शन लिया है लेकिन अशोक गहलोत को क्लीन चिट दी है. इसपर भी सवाल उठ रहे हैं. माना यह भी जा रहा है कि गहलोत अध्यक्ष पद की रेस में अभी भी बने हुए हैं. सूत्र बताते हैं कि गहलोत ने चुनाव का अंतिम फैसला सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है. अब गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह गुरुवार सुबह तक साफ हो सकता है.

दिग्विजय सिंह का पलड़ा कितना भारी?
दिग्विजय के पास लंबा संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव है. वह 1997 में पहला विधानसभा चुनाव जीते थे. वह दो बार मध्य प्रदेश के सीएम भी रहे हैं. उनकी गिनती गांधी परिवार के वफादारों में होती है. कांग्रेस फिलहाल संघ और उनके हिंदुत्व के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही है. इन्हीं के खिलाफ दिग्विजय सिंह भी लंबे वक्त से मुखर होकर बात करते रहे हैं.

खामियों की बात करें तो 2019 में दिग्विजय सिंह खुद 2019 में भोपाल से चुनाव हार गए थे. बयानों की उनकी मुखरता कुछ मौकों पर बैकफायर भी कर देती है, जिससे पार्टी को भी कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. मौजूदा दौर में दिग्विजय का जनसमर्थन भी सिमटता दिखता है. परिवारवाद के आरोपों का सामना भी दिग्विजय कर रहे हैं. उनपर बेटे और भाई को राजनीति में सेट करने के आरोप लगते रहे हैं.

शशि थरूर की दावेदारी कितनी मजबूत?
थरूर केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद हैं. चुनाव में शशि थरूर का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. करिश्माई व्यक्तित्व वाले थरूर तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. देश के साथ-साथ विदेश में थरूर की पहुंच है. संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर भी कुछ प्रोजेक्टस पर काम कर रहे हैं. मंत्री के तौर पर थरूर ने काम किया है इसलिए उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है.

दूसरी तरफ थरूर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि वह असंतोष धड़े जी-23 का हिस्सा थे. गहलोत जबतक फ्रेम में थे, तबतक माना जा रहा था कि थरूर को इस चुनाव में गांधी परिवार का समर्थन नहीं मिलेगा क्योंकि उनकी पसंद गहलोत हैं. पार्टी में वह ज्यादा पुराने भी नहीं है. 2009 में ही थरूर कांग्रेस में आए थे. विवादों से नाता, हिंदी पर कम पकड़ भी उनके खिलाफ जा सकता है.

प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की भी उठी मांग
कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव में गांधी परिवार का कोई सदस्य नहीं होगा, बावजूद इसके राहुल गांधी के बाद प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग उठ रही है. कांग्रेस सांसद अब्दुल खलीक ने कहा है कि प्रियंका अब वाड्रा परिवार की बहू हैं, इसलिए उनको अध्यक्ष बनाने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

 

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