मुंबई
नागपुर के शीतकालीन सत्र के दौरान मंत्रियों और विधायकों के चेहरे पर खुशी नहीं है। हर कोई नाराज ही है। सत्ताधारी के विधायक इसलिए नाराज है कि उसे मंत्री नहीं बनाया और जिसे मंत्री बनाया है वह इसलिए नाराज है कि मंत्रियों के विभाग का बंटवारा नहीं हो रहा है। विरोधी खेमा में इस बात से नाराजी है कि सरकार विरोधी पक्ष नेता पद नहीं दे रही है। तो कांग्रेस के विधायक इसलिए नाराज है कि विधायक दल का नेता नहीं बनाया।
विस्तार में टूटा कईयों का सपना
नागपुर का यह सत्र बेहद ही रोचक है। बड़ी बहुमत के साथ महायुति की सरकार बनी। महायुति के वरिष्ठ विधायकों को उम्मीद थी कि कम से कम उन्हें मंत्री बनने का अवसर जरूर मिलेगा। लेकिन उनकी उम्मीद पर उनकी ही पार्टी के नेताओं ने पानी फेर दिया। पिछली सरकार में जो मंत्री थी उनमें से कईयों को मंत्री नहीं बनाया गया। छगन भुजबल, तानाजी सावंत, सुधीर मुनगंटीवार सहित तमाम विधायकों ने अपनी नाराजगी प्रकट की। मागाठाणे के विधायक प्रकाश सुर्वे का मंत्री बनना तय था, लेकिन अंतिम समय में उनकी जगह पर किसी और को मंत्री बना दिया। इससे वे नाराज है। संतोष व्यक्त करते हुए विधायक सुर्वे ने हिंदी गाने में अपना भाव प्रकट किया। उन्होंने कहा कि ‘इस दुनिया में कितना गम है और मेरा गम कितना कम है।’ उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के लिए श्रद्धा और सबुरी की जरूरत पड़ती है। किसी उत्तरभारतीय और किसी गुजराती को मंत्री नहीं बनया। इनकी नाराजगी अलग हैं।
विभाग न मिलने से नाराज
सरकार ने जिन लोगों को मंत्री बनाया है उन्हें विभाग नहीं दिए हैं। हालांकि शपथ ग्रहण समारोह के बाद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया था कि दो दिन में विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा, लेकिन दो क्या आज छठा दिन है फिर भी कोई निर्णय नहीं हुआ। अब तो कहा जाने लगा है कि नागपुर में विभाग बंटवारे की संभावना नहीं है। ऐसे में जिन्हें मंत्री बनाया गया है उनके पास कोई काम नहीं है। बातचीत के दौरान एक कैबिनेट मंत्री ने अपनी दिल की बात को जुबान से उतार दी। कहा कि बिना खाते का मंत्री दिल को बेचैन कर देता है। आखिर वे करे तो क्या काम करें?
विपक्ष के विधायकों की अलग नाराजगी
इधर, विरोधी दल के विधायक बेचैन है। खासकर, कांग्रेस में। विधानसभा में मात्र 16 विधायकों वाली कांग्रेस शीतकालीन सत्र खत्म होने तक विधान मंडल का अपना नेता नहीं चुन सकी है। उसे एक नेता की तलाश है। उद्धव सेना की परेशानी यह है कि सत्ताधारी दल विधानसभा में उसे विरोधी पक्ष नेता पद नहीं दे रही है। शरद पवार की एनसीपी के विधायक बड़े असमंजस में हैं। शरद पवार ने जब से दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले है तब से वे बेचैन है। कुछ विधायकों ने अजित पवार के साथ मधुर संबंध बनाने के रास्ते की तलाश कर रहे हैं।
