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घर-घर दस्तक और सिग्नेचर अभियान… स्टालिन को मात देने का BJP ने बनाया खास प्लान

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चेन्नई

तमिलनाडु में परिसीमन और हिंदी पर सियासी विवाद के बीच बीजेपी अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारी में जुट गई है. तमिलनाडु में अपने पैर जमाने की कोशिश में लगी बीजेपी भाषा विवाद को लेकर अब तमिलनाडु की जनता के बीच जा रही है. पार्टी का मकसद राज्य की डीएमके सरकार की पोल खोलना है. बीजेपी का मानना है कि तमिलनाडु सीएम अपनी सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए अभी से माहौल तमिलनाडु बनाम केंद्र बनाने में लगे हैं. साथ ही बीजेपी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन की कोशिशें भी शुरू कर दी है.

बीजेपी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के समर्थन में राज्य में एक करोड़ लोगों तक पहुंचने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है. इसके जरिए बीजेपी घर-घर दस्तक देगी और लोगों को बताएगी कि कैसे तीसरी भाषा कोई भी भारतीय भाषा हो सकती है और हिंदी को लेकर जानबूझकर राजनीतिक फायदे के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है.

डीएमके के नैरेटिव को काउंटर करने में मदद
पार्टी को लगता है कि जहां इससे पार्टी को डीएमके के नैरेटिव को काउंटर करने में मदद मिलेगी तो वहीं बीजेपी के नेता और कार्यकर्ताओं की जमीन और जनता के बीच मौजूदगी और कनेक्टिविटी भी दिखेगी. बीजेपी के नेता इस मुद्दे पर अभी घर-घर जा रहे हैं और आने वाले दिनों में पार्टी इसे आंदोलन के तौर पर राज्य के अलग-अलग शहरों में बड़ी रैलियां भी करेगी.

बीजेपी का मानना है कि राज्य की डीएमके सरकार ने जनता से किए वादे पूरे नहीं किए और अब चुनाव के पहले पुराने हिंदी विरोध को फिर से उभारने की कोशिश कर रही है. बीजेपी ने तय किया है कि घर-घर दस्तक के बाद इस मुद्दे पर पब्लिक मीटिंग की जाएगी. इसकी शुरुआत 23 मार्च को तिरुचिरापल्ली से होगी और 11 मई को कोयम्बटूर में आखिरी मीटिंग होगी.

तिरुचिरापल्ली में 23 मार्च
तिरूनेलवेली में 29 मार्च
वेल्लोर में 5 अप्रैल
कांचीपुरम में 12 अप्रैल
सालेम में 19 अप्रैल
चेन्नई में 26 अप्रैल
मदुरै में 3 मई
कोयम्बटूर में 11 मई

गरीब के बच्चे दो ही भाषा क्यों पढ़ें?
इन मीटिंग में बीजेपी लोगों को बताएगी कि जो थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले के विरोध में हैं, उनके बच्चे तो उन स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जहां थ्री लैंग्वेज पढ़ाई जाती है. जबकि गरीब बच्चे सरकारी स्कूल में जाते हैं, जहां दो भाषाएं ही पढ़ाई जाती हैं. ऐसे में गरीब के बच्चे दो ही भाषा क्यों पढ़ें? बीजेपी ये भी बताएगी कि कैसे डीएमके नेताओं द्वारा राज्य में संचालित प्राइवेट स्कूल जो सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध हैं, वहां थ्री लैंग्वेज का विकल्प रहता है.

दरअसल, बीजेपी जानती है कि यह मुद्दा जितना बड़ा बनेगा उतना पार्टी के लिए मुश्किल बढ़ सकती है. क्षेत्रीय अस्मिता/प्राइड के उभार के चलते उसके सहयोगी भी दूर जा सकते हैं. लिहाजा बीजेपी ने राज्य में गठबंधन की कोशिशें अभी से शुरू कर दी हैं. हाल के दिनों में बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच तल्खी कम होती नजर आ रही है.

तमिलनाडु में बढ़ा बीजेपी का वोट शेयर
लिहाजा बीजेपी ने भी गठबंधन को लेकर अपने रुख को नरम किया है. डीएमके को राज्य की सत्ता से बाहर करने के लिए जहां प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष अन्नामलाई ने AIADMK के साथ संभावित गठबंधन को लेकर नरमी दिखाई है. वहीं AIADMK महासचिव ई. पलानीस्वामी ने भी बीजेपी के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज नहीं किया. बीजेपी को लगता है कि 2026 विधानसभा चुनाव में गठबंधन करने से सरकार बनाने की संभावना ज्यादा है.

बीजेपी की इस उम्मीद की वजह 2024 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में बीजेपी का बढ़ा वोट शेयर है. 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य में बीजेपी का वोट शेयर 2019 के मुकाबले तीन गुना बढ़कर 11.24 फीसदी हो गया. हालांकि, वोट शेयर बढ़ोतरी की एक वजह बीजेपी का 2019 में 5 की बजाए 2024 में 23 सीटों पर चुनाव लड़ना भी है. पर बीजेपी इसे अपने लिए तमिलनाडु की जनता के बढ़ते समर्थन के तौर पर देख रही है.

नए समीकरणों की संभावनाओं की तलाश
बीजेपी और एआईएडीएमके ने कई चुनाव साथ लड़े हैं लेकिन 1998 के बाद दोनों के रिश्ते टूटते और जुड़ते रहे हैं. ये बात एआईडीएमके भी जानती है कि बीजेपी के तमिलनाडु में पैर पसारने से डीएमके का वोट घटा है तो गठबंधन से एआईएडीएमके का फायदा होता रहा है. दोनों दलों के गठबंधन को आसान बनाने के लिए बीजेपी प्रदेश नेतृत्व में भी बदलाव करने पर विचार कर रही है क्योंकि मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष अन्नामलाई एआईएडीएमके से गठबंधन के खिलाफ रहे हैं.

ऐसे में बीजेपी प्रदेश की कमान तमिलिसाई सुंदरराजन या वानती श्रीनिवासन को दे सकती है. ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में नए समीकरणों की संभावनाएं तलाशी जा रही है. एक तरफ फिल्म स्टार थलापति विजय अपनी नई पार्टी टीवीके के साथ सियासी जमीन तलाशने में लगे हैं तो वहीं बीजेपी भी गठबंधन के सहारे पैर जमाने की कोशिश में है. गृहमंत्री अमित शाह आज रात तमिलनाडु पहुंच रहे हैं और शुक्रवार को CISF के स्थापना दिवस में शिरकत करेंगें. ऐसे में इस यात्रा के दौरान पार्टी के संगठन के लिहाज से राजनीतिक बैठकें भी कर सकते हैं.

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