10.8 C
London
Wednesday, December 10, 2025
Homeराज्यविकास के लिए शिक्षा अनिवार्य लेकिन वह भारत-केंद्रित हो: संघ प्रमुख मोहन...

विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य लेकिन वह भारत-केंद्रित हो: संघ प्रमुख मोहन भागवत

Published on

नई दिल्ली

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)प्रमुख मोहन भागवत शुक्रवार को गुरुग्राम पहुंचे थे। यहां वह ‘विविभा-2024:विकसित भारत के लिए विजन’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। भागवत ने कहा कि विकास के लिए शिक्षा अनिवार्य लेकिन वह भारत-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने विकास के मॉडल बनाने की जरूरत है जो वैश्विक उदाहरण बन सकें।

भारत-केंद्रित हो- मोहन भागवत
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं है,लेकिन यह शिक्षा भारत-केंद्रित होनी चाहिए। हमें दुनिया भर से अच्छे विचार लेने चाहिए, लेकिन कभी भी अंधाधुंध अनुयायी नहीं बनना चाहिए। भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित शोध के लिए शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है।

“भारतीय शिक्षण मंडल- युवा आयाम” की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जैसे विशिष्ट वक्ताओं ने देश भर के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ विकसित भारत को प्राप्त करने के बारे में अपने विचार साझा किए। एस सोमनाथ ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में अगले 25 वर्षों के महत्व पर प्रकाश डाला।

’16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था’
मोहन भागवत ने कहा कि पहली शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक भारत हर क्षेत्र में आगे था। हमने बहुत पहले ही बहुत कुछ खोज लिया था। हम बस रुक गए और इसी कारण हमारा पतन शुरू हुआ। उन्होंने खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में पिछले 10,000 सालों से खेती हो रही है, लेकिन जमीन,पानी,हवा के प्रदूषित होने की समस्या कभी नहीं थी। लेकिन जब बाहर से खेती आई, तो 500-600 सालों में ही ये चीजें होने लगीं। भागवत ने कहा, ‘कहीं न कहीं भारत की दृष्टि में कमी थी, जिसके कारण विकास भी एकतरफा हुआ। भारत में विकास समग्र रूप से होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि आजकल बहस इस बात पर होती है कि विकास किया जाए या पर्यावरण की रक्षा,जैसे हमें एक को चुनना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में,यह एक या दूसरे को चुनने के बारे में नहीं है,बल्कि दोनों को एक साथ लेकर चलने के बारे में है। भागवत ने आगे कहा कि सिर्फ चार प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहते हैं। इस तरह का विकास लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करके धकेला गया है।

भागवत ने कहा कि जो लोग तकनीकी विकास को आगे बढ़ाते हैं,तो आप देख सकते हैं कि वे आबादी का सिर्फ 4 प्रतिशत हैं,लेकिन उन्हें 80 प्रतिशत संसाधनों की जरूरत है और उन संसाधनों को प्राप्त करने के लिए वे कई लोगों पर लाठी का इस्तेमाल करना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास के लिए लोगों को वास्तव में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और जुनून के साथ काम करना पड़ता है,लेकिन उन प्रयासों का फल बहुतों को नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि जुनून को फिर से जगाने के लिए लाठी का इस्तेमाल उनके ही लोगों पर करना चाहिए,ऐसी स्थितियां हर जगह देखने को मिलती हैं।

Latest articles

Shubman Gill ने खोल दिया अपनी चोट का राज़! बोले- “मेरी गर्दन की डिस्क में…” T20 वर्ल्ड कप से पहले कही बड़ी बात!

टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) ने उस गंभीर चोट का...

अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर शहर में कार्यक्रम आज

भोपाल।अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर 10 दिसंबर को विभिन्न संगठनों द्वारा शहर...

आठवीं की छात्रा और सातवीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

भोपाल।शहर में दो अलग-अलग स्थानों पर आठवीं कक्षा की एक छात्रा और सातवीं कक्षा...

More like this

खजुराहो में कैबिनेट बैठक : बुंदेलखंड विकास के लिए कई बड़े निर्णय

भोपाल ।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को खजुराहो के महाराजा छत्रसाल...

पन्ना नेशनल पार्क में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 नई कैंटर बसों को दिखाई हरी झंडी

पन्ना ।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार सुबह पन्ना नेशनल पार्क के मड़ला गेट...

ओरछा को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी तेज, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने किया व्यापक निरीक्षण

ओरछा/भोपाल।राज्य सरकार ने ऐतिहासिक नगरी ओरछा को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित...