बिहार में सियासी उठापटक के बाद जेडीयू-महागठबंधन की सरकार बन गई है। बावजूद इसके जुबानी हमलों का दौर बीजेपी और जेडीयू दोनों ही ओर से जारी है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरसीपी सिंह पर करारा वार किया। उन्होंने आरसीपी को बीजेपी का एजेंट बताया। ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने उन पर भरोसा किया, उन्हें खुद अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन बीजेपी ने उन्हें अपने पाले में मिला लिया। जेडीयू अध्यक्ष ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जरूरत थी इसलिए कोई गड़बड़ नहीं हुई। जैसे ही 2020 का चुनाव आया तो हमारी पार्टी के एक नेता (आरसीपी सिंह) को आपने अपने पाले में मिला लिया और षड्यंत्र किया।
ललन सिंह का बीजेपी और आरसीपी पर बड़ा हमला
जेडीयू अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी के नेता विश्वासघाती हैं। 2020 के चुनाव में साजिश के तहत बीजेपी ने अपने नेताओं को एलजेपी की सदस्यता दिलाकर जेडीयू के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव हारने के बाद वो सभी नेता वापस बीजेपी में चले गए, क्या यही गठबंधन धर्म का पालन है? 2020 के चुनाव में हमारे कार्यकर्ताओं की वजह से बीजेपी जीती, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमें हराने का काम किया। यही नहीं ललन सिंह ने कहा कि 2020 के चुनाव में जेडीयू को हराने के षड्यंत्र में बीजेपी के साथ आरसीपी सिंह भी मिले हुए थे।
‘बीजेपी के इशारे पर जेडीयू में भितरघात की कोशिश में थे RCP’
ललन सिंह ने दावा किया कि आरसीपी सिंह की बीजेपी के साथ मिलीभगत थी और वो बीजेपी के इशारे पर जेडीयू में भीतरघात की कोशिशों में जुटे थे। बीजेपी के उस समय जो प्रभारी थे, वो रात में 10 बजे, साढ़े 10 बजे आते थे। वो लिस्ट देते थे आरसीपी सिंह को कहते कि इनसे बात कीजिए। बीजेपी प्रभारी आरसीपी से कहते थे कि नए-नए लोगों को लाइए ताकि वो नीतीश कुमार के खिलाफ बोलते रहें। इधर कहते थे कि आप खेलते रहिए। जब ललन सिंह से नाम पूछा गया तो जेडीयू अध्यक्ष ने कहा कि सबको पता है नाम लेने की जरूरत नहीं है।
‘2017 में तेजस्वी का साथ छोड़ने की सलाह देने वालों में RCP भी थे’
ललन सिंह ने बताया कि 2017 में जिन चार नेताओं की सलाह पर नीतीश कुमार ने तेजस्वी का साथ छोड़ा उनमें एक आरसीपी सिंह भी थे, जो अब बीजेपी के एजेंट बन गए हैं। एक हमारे बीच में भी बैठे हैं, संजय झा की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये अभी भी बरकरार हैं। जेडीयू नेता ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने आप पर जो भरोसा किया, आंख मूंद कर विश्वास किया आपने उनके पीठ पर वार किया।
2019 के लोकसभा चुनाव में कैसे RCP ने किया खेल
वहीं ललन सिंह ने पीसी के दौरान कहा कि ‘2020 के पहले भी एक बार खेल हुआ था। 2019 लोकसभा चुनाव की एक सीट थी, जिस पर जेडीयू को हार मिली थी।’ वो सीट किशनगंज की थी। इसके अलावा एनडीए ने बिहार की सभी 39 सीटें जीती थीं। उन्होंने सीधे तौर पर तो नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि उस समय भी पार्टी जो सीट चाहती थी वो नहीं मिली। दरअसल, 50-50 सीट शेयरिंग फाइनल होने के बाद कहां से कौन लड़ेगा ये तय करने के लिए नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह का नाम आगे बढ़ाया था। पार्टी दरभंगा की सीट चाहती थी, लेकिन गठबंधन में उसे किशनगंज की सीट दी गई। ऐसा माना जा रहा कि आरसीपी ने खेल किया था वो उस समय बोले नहीं जब सीट को लेकर डिमांड करनी थी। इसको लेकर नीतीश कुमार ने भी तब नाराजगी जताई थी। बाद में किशनगंज से कांग्रेस कैंडिडेट ने जीत दर्ज की थी।
