रांची,
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष तो कमजोर दिखा, लेकिन कांग्रेस ने सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर लिया. कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने पेयजल विभाग में फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये की निकासी का मामला उठाया, जिससे सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो गया.
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की स्वर्णरेखा परियोजना के तहत 2023 में रांची और लोहरदगा में L&T कंपनी ने कार्य किया था. भुगतान के लिए कंपनी को पैसे देने के बजाय, विभाग के अधिकारियों ने फर्जी खातों के जरिए 22 करोड़ रुपये निकाल लिए. इस घोटाले में सिर्फ क्लर्क संतोष कुमार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जबकि वरिष्ठ अधिकारी बच गए थे. इस मुद्दे पर पहले भी सदन में हंगामा हो चुका था, जिसके बाद स्पीकर ने प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रताप को पूरी तैयारी के साथ जवाब देने को कहा था.
सदन में हंगामा, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
मंगलवार को जब इस मामले पर चर्चा हुई, तो कांग्रेस के प्रदीप यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “खोदा पहाड़, निकली चुहिया!” उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं और असली दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो रही.
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस नीति” पर काम कर रही है. उन्होंने बताया कि संतोष कुमार पर 2.71 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा, वित्त विभाग की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.
सीआईडी जांच की सिफारिश पर सवाल
पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने इस मामले की सीआईडी और एसीबी जांच की सिफारिश की थी. उन्होंने कहा कि सीआईडी की जांच का अनुभव उनके पास है, लेकिन इस एजेंसी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं, क्योंकि यह कई बार मामलों को उलझाने या दबाने का काम भी करती है.
योगेंद्र प्रताप ने दी सफाई
प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रताप ने सदन में बताया कि वरिष्ठ लिपिक संतोष कुमार को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है. आरोपी के खाते को फ्रीज कर दिया गया है और संपत्तियों की बिक्री के लिए नोटिस जारी किया गया है.
सदन में कांग्रेस नेता प्रदीप यादव ने एक और घोटाले का मामला उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि गढ़वा प्रमंडल में 104 ई-रिक्शा बाजार मूल्य से दोगुनी कीमत पर खरीदे गए. इसके अलावा, खरीदारी किसी अधिकृत विक्रेता से भी नहीं की गई. उन्होंने इस घोटाले की जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की मांग की
