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बीजेपी MLA को सुप्रीम झटका! दो हफ्ते में करना होगा सरेंडर, कांग्रेस के विरोध के बाद विधायकी भी जाना तय!

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जयपुर

राजस्थान के बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। एसडीएम पर रिवॉल्वर तानकर जान से मारने की धमकी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें मीणा को तीन साल की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि मीणा को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। इस फैसले के बाद उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है।

SDM पर रिवाल्वर तानने का यहां जानें पूरा मामला
वर्ष 2005 में झालावाड़ जिले के खाताखेड़ी गांव में उपसरपंच चुनाव के दौरान कंवरलाल मीणा ने पुनर्मतदान के मुद्दे पर तत्कालीन एसडीएम रामनिवास पर रिवॉल्वर तानकर धमकी दी थी। उन्होंने सरकारी वीडियोग्राफी की कैसेट भी तोड़ दी थी। इस मामले में अकलेरा की एडीजे कोर्ट ने दिसंबर 2020 में मीणा को तीन साल की सजा सुनाई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 मई 2025 को इस फैसले को बरकरार रखा था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीणा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन बुधवार को उनकी याचिका खारिज कर दी।

कांग्रेस ने उठाई सदस्यता रद्द करने की मांग
इस मामले ने राजस्थान की सियासत को गरमा दिया है। कांग्रेस ने बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा की विधानसभा सदस्यता तत्काल रद्द करने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और चीफ व्हीप रफीक खान के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा सचिव को ज्ञापन सौंपा। जूली ने कहा कि लिली थॉमस केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्पष्ट है कि दो साल से अधिक सजा पाने वाले सांसद या विधायक की सदस्यता उसी दिन रद्द हो जानी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की सदस्यता 24 घंटे में रद्द होने का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि मीणा की सदस्यता पर देरी क्यों?

विधानसभा अध्यक्ष ने मांगी कानूनी राय
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस मामले में कानूनी राय लेने की बात कही है। उनका कहना है कि मीणा को अंतरिम जमानत मिली थी, इसलिए फैसला लेने से पहले कानूनी पहलुओं की जांच जरूरी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद मीणा की विधायकी पर संकट गहरा गया है। कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने चेतावनी दी कि यदि 8 मई तक कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द नहीं की गई, तो कांग्रेस विधिक कार्रवाई के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा, ‘देश में एक कानून होना चाहिए। राहुल गांधी की सदस्यता 24 घंटे में रद्द कर दी गई थी, लेकिन मीणा के मामले में देरी क्यों? हाईकोर्ट के फैसले की प्रमाणित प्रति विधानसभा को सौंपी जा चुकी है। अब और बहाने नहीं चलेंगे।’

21 मई तक सरेंडर करना होगा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कंवरलाल मीणा को 21 मई तक सरेंडर करना होगा। उनकी विधायकी रद्द होने की स्थिति में झालावाड़ क्षेत्र में उपचुनाव की संभावना बढ़ गई है। यह मामला राजस्थान की सियासत में बीजेपी और कांग्रेस के बीच तनातनी को और बढ़ा सकता है।

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