मुजफ्फरपुर:
जब तक इंसाफ की उम्मीद दिखाई देती है, तब तक लोग उम्मीदों की डोर थामे रहते हैं। मगर, जब उम्मीद वाली डोर मलीन होने लगती है तो दुनिया बेकार दिखती है। शुक्रवार को कुछ ऐसा ही हुआ बिहार के मुजफ्फरपुर में। कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, इंसाफ के लिए यूं हीं कोई डीएम ऑफिस में खुद को आग थोड़े न लगाता है। दो दिन पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जमीन विवाद से जुड़े काम में ढिलाई बरतने के लिए मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा पर खरी-खोटी सुनाई थी। काम समय पर करा देने पर राजस्व और भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के सामने हाथ जोड़कर पैर छूने का वादा किया था।
डीएम ऑफिस कैंपस में किसान ने लगाई खुद को आग
मुजफ्फरपुर डीएम ऑफिस में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की ओर से जनता दरबार का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए कांटी के रहने वाले 50 साल के किसान बिंदा राय भी आए थे। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी इस तरह के कई जनता दरबार में अफसरों से गुहार लगा चुके थे। मगर, उनके मामले पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साल-दर-साल उनकी पेरशानियां बढ़ती गई।
जमीन विवाद को लेकर सरकारी ऑफिसों का चक्कर लगा रहे थे बिंदा
किसान बिंदा राय पिछले चार साल से चल रहे भूमि विवाद का निपटारा चाहते थे। इसी के लिए शुक्रवार को भी डीएम के जनता दरबार में आए थे। मगर, उन्होंने जो किया उसे सही नहीं ठहराया जा सकता। कलेक्ट्रेट में चल रहे डीएम सुब्रत कुमार सेन के जनता दरबार में पेट्रोल छिड़क कर आत्मदाह करने का प्रयास किया। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने आग बुझा कर तत्काल सदर अस्पताल में लाकर भर्ती कराया।
पुलिसकर्मी और स्थानीय लोगों ने किसान को आत्मदाह से बचाया
सूचना पर सदर अस्पताल पहुंचे एएसपी टाउन भानू प्रताप सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन का जनता दरबार लगा हुआ था, जिसमें कांटी के बिंदा लाल राय पूर्व के चल रहे जमीन विवाद के निपटारे के लिए पहुंचे थे। 4 सालों से विवाद का निपटारा नहीं होने को लेकर उन्होंने पेट्रोल डाल कर आत्मदाह का प्रयास किया। पुलिसकर्मी और स्थानीय लोगों ने उन्हें बचा लिया। बेहतर इलाज के लिए एसकेएमसीएच के बर्न वार्ड में रेफर किया गया है।
