नई दिल्ली
पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर डटे किसान आज पैदल दिल्ली कूच करेंगे। अंबाला के शंभू बॉर्डर, जींद के खनौरी और सोनीपत के सिंघू के पास पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई है। शंभू-खनौरी बॉर्डर पर करीब 10 हजार किसान जमा हो गए हैं जिन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने दोनों तरफ अर्द्धसैनिक बलों की 29 कंपनियां तैनात की हैं और सीमाओं को सील किया गया है। अंबाला में स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। किसानों के दिल्ली मार्च के मद्देनजर पुलिस ने अंबाला-दिल्ली सीमा पर सुरक्षा कड़ी करते हुए बैरिकेडिंग कर दी है। वहीं, किसानों ने 101 लोगों के जत्थे की लिस्ट प्रशासन को सौंपी है और आगे जाने की अनुमति मांगी है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने गुरुवार को कहा था कि 101 किसानों का एक जत्था शंभू बॉडर विरोध प्रदर्शन स्थल से शुक्रवार दोपहर एक बजे दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू करेगा। सुरक्षा बलों द्वारा दिल्ली की ओर मार्च रोके जाने के बाद वे 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। हालांकि, अंबाला जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत एक आदेश जारी किया है, जिसमें जिले में पांच या अधिक व्यक्तियों की किसी भी गैरकानूनी सभा पर रोक है। उपायुक्त द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अगले आदेश तक पैदल, वाहन या अन्य साधनों से कोई भी जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गयी है। पढ़ें- ‘किसान संगठनों में फूट, हरियाणा की यूनियनों ने ‘दिल्ली चलो’ प्रोटेस्ट से बनाई दूरी
किसानों के विरोध पर हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कहा, “क्या उन्होंने अनुमति ली है? उन्हें बिना अनुमति के दिल्ली जाने की परमिशन कैसे दी जा सकती है? अगर उन्हें अनुमति मिलेगी तो उन्हें परमिशन दी जाएगी। आप वहां जा रहे हैं किसी कार्यक्रम के लिए अगर आपको वहां बैठना है तो अनुमति लेनी होगी।”
क्या है किसानों की मांग
किसान एमएसपी के अलावा कर्ज माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन और बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने की मांग कर रहे हैं। वे 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग कर रहे हैं।
किसान अगर एक दिन हड़ताल करते हैं तो देश बंद हो जाएगा- मनोज झा
किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च पर राजद सांसद मनोज झा का कहना है, “सरकार को इसमें कहां दुविधा दिख रही है? यह उनका देश है, वे अन्नदाता हैं। अगर वे एक दिन के लिए सांकेतिक हड़ताल करते हैं , देश बंद हो जाएगा”
