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Tuesday, March 31, 2026
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मिलेगी राहत या चलेगा केस? सोरेन की याचिका पर कल SC में होगा फैसला

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नई दिल्ली,

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लीज आवंटित करने और उनके भाई बसंत सोरेन के करीबियों द्वारा अवैध कमाई को शेल कंपनी में निवेश करने के खिलाफ दायर याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को फैसला सुनाएगा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने 17 अगस्त को हेमंत सोरेन और राज्य सरकार की अपील याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ गलत तरीके से खनन लीज आवंटित कराने और उनके करीबियों द्वारा शेल कंपनी में निवेश का आरोप लगाते हुए झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है. इसके बाद झारखंड सरकार और हेमंत सोरेन ने याचिका सुनवाई योग्य नहीं होने की बात कही. हाई कोर्ट ने इस पर सुनवाई की और माना कि दोनों याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं. हाई कोर्ट के इस फैसले को सीएम हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

SC ने अगस्त में दी थी राहत
दरअसल हेमंत सोरेन ने सुनवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटिशन) दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई हुई. शेल कंपनियों में निवेश और अवैध खनन पट्टा आवंटन मामले से जुड़ी याचिकाओं पर हेमंत सोरेन को अंतरिम राहत मिली थी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला आने तक हाई कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने ED की दलील पर उठाए थे सवाल
गौरतलब है कि अगस्त में हुई सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट में दाखिल पीआईएल की मेंटेनेबिल्टी पर सवाल उठाए थे. सिब्बर ने कहा था कि पीआईएल डराने के लिए दाखिल की गई है. याचिकाकर्ता के पिता की सोरेन परिवार के साथ पुरानी रंजिश रही है.

इस मामले में ईडी के वकील ने कहा था कि खनन मामले में उसके पास पर्याप्त सबूत हैं, जिसके आधार पर याचिका पर सुनवाई जारी रखी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की दलील को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा कि अगर ईडी के पास मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत हैं, तो वो खुद इसकी जांच कर सकती है. वह पीआईएल की आड़ में जांच के लिए कोर्ट का आदेश क्यों चाहती है? इसके बाद कोर्ट ने एसएलपी पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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