नई दिल्ली
साल 2023 की शुरुआत भारतीय कारोबारियों के लिए कुछ खास अच्छी साबित नहीं हुई है। भारत के बड़े-बड़े कारोबारी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहे हैं। भारत के दिगग्ज कारोबारियों की दौलत घट रही है। बाजार में गिरावट का असर उनके शेयरों पर देखने को मिल रहा है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अजानी समूह सबसे खराब दौर से गुजर रही है। कंपनी का मार्केट कैप घटकर मात्र 7 लाख करोड़ रह गया है। कंपनी के कुल बाजार वैल्यू में 63 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। 24 जनवरी को अडानी समूह का मार्केट वैल्यू 19.19 लाख करोड़ था, जो गिरकर अब 7 लाख करोड़ के करीब रह गया है।
अडानी नहीं इन पर भी कर्ज का बोझ
भारतीय कारोबारी इन दिनों बुरे दौर से गुजर रहे हैं। खासकर उन कारोबारियों के लिए ये वक्त काफी भारी है, जिनकी कंपनियों पर भारी भरकम कर्ज का बोझ है। अडानी समूह के 236 अरब डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर अंपायर को एक महीने में 63 फीसदी का झटका लगा है। हालांकि नुकसान झेलने वालों में अडानी अकेले नहीं हैं। अडानी के अलावा अनिल अग्रवाल की कंपनी भी मुश्किल दौर से गुजर रही है। भारत के माइनिंग किंग कहे जाने वाले अनिल अग्रवाल की लंदन में लिस्टेड वेदांता रिसोर्सेज काफी कर्ज में डूबी है। जनवरी 2024 तक कंपनी इस कर्ज के बोझ को कम करना चाहती थी। जनवरी में उन्हें 100 करोड़ डॉलर का कर्ज चुकाना था। हालांकि लोन को कम करने की उनकी कोशिश ने उनके एक पार्टनर को नाखुश कर दिया, जिसे वो नाराज नहीं करना चाहते थे।
कर्ज को घटाने की कोशिश
बीते साल जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाना शुरू किया, इसी समय रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ , जिसके बाद कमोडिटी के भाव आसमान छूने लगे। इसी दौरान अनिल अग्रवाल वेदांता रिसोर्सेज और वेदांता लिमिटेड पर कर्ज के बोझ को कम करने की कोशिशों में जुटे रहे। इस कोशिश में वो थोड़े सफल भी रहे। उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज पिछले साल 10 अरब डॉलर से घटाकर 8 अरब डॉलर कर लिया था।
वेदांता के लिए चुनौती
वेदांता के अनिल अग्रवाल को 1.5 अरब डॉलर का लोन मंजूर कर लिया गया था। उन्होंने इस साल सितंबर में बॉन्ड के रीपेमेंट की बातचीत शुरू कर दी। अब उनके सामने इस साल और जनवरी 2024 में उनके सामने चुनौतियां दिखाई दे रही हैं। वेदांता रिसोर्सेज के अगस्त 2024 के बॉन्ड रेट 70 सेंट से नीचे पर कारोबार कर रहे हैं। वेदांता के लिए अगले कुछ हफ्ते फंड रेजिंग के हिसाब से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। अगर वेदांता फंड नहीं जुटा पाती है तो उनकी क्रेडिट रेटिंग खराब हो सकती है। स्टैंडर्ड्स एंड पुअर्स ने इसे लेकर कहा कि अगर फंड रेंज नहीं हो पाता है तो वेदंता दबाव में आ सकती है।
अडानी की तुलना में वेदांता पर कितना कर्ज
अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता पर गौतम अडानी की कंपनियों पर कर्ज की तुलना में तीन गुना कम कर्ज का बोझ है। अडानी का कर्ज का बोझ 24 अरब डॉलर है। भले ही वेदांता पर कर्ज का बोझ अडानी से मुकाबले कम हो, लेकिन उनका बॉन्ड भी इन्वेस्टमेंट ग्रेड के हिसाब से सबसे निचले पायदान पर चल रहा है, जो कंपनी के लिए चिंता का विषय है।
चाहकर भी नहीं बेच पाए अनिल अग्रवाल
वेदांता ग्रुप अपने कर्ज को कम करने के लिए अपनी एक यूनिट को हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को बेचना चाहते हैं। ऐसा करके वो अपने कर्ज के बोझ को कम करना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा है। दरअसल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में सरकार की करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार के इस आदेश के बाद अनिल अग्रवाल के कर्ज कम करने की योजना को झटका लगा है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने कहा कि अगर वेदांता ने अपने इंटरनेशनल जिंक एसेट्स को बेचकर 2 अरब डॉलर नहीं जुटा पाती है तो कंपनी पर दवाब बढ़ सकता है।
वेदांता के शेयरों का हाल
कंपनी पर बढ़ रहे दवाब का असर उनकी शेयरों पर भी दिखने लगा है। सोमवार को कंपनी के शेयर Vedanta Limited के शेयर करीब 3 फीसदी गिरकर 286.75 रुपये पर रहा। इतना ही नहीं अनिल अग्रवाल की निजी संपत्ति में भी बड़ी गिरावट आई। फोर्ब्स बिलेनियर लिस्ट के मुताबिक सोमवार को अनिल अग्रवाल के नेटवर्थ में 139 मिलियन डॉलर की गिरावट देखने को मिली। उनका नेटवर्थ घटकर मात्र 2 अरब डॉलर रह गया।
