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इजरायल-हमास युद्ध से नुकसान के साथ भारत को ये फायदे भी, दवा इंडस्ट्री के लिए मौका-मौका

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नई दिल्ली

हमास आतंकियों के हमले के बाद से इजरायल की जबावी कार्रवाई लगातार जारी है। इजरायल से तय कर लिया है कि जब तक वो हमास आतंकियों को खत्म नहीं कर देता युद्ध जारी रखेगा। युद्ध वैसे तो किसी के लिए भी अच्छा नहीं है, लेकिन इजरायल हमास के बीच जारी इस जंग से कई फायदे भी छिपे है। ग्लोबल इकॉनमी के दौर में हर देश दूसरे से लिंक है। ऐसे में जंग का असर केवल इजरायल और फिजिस्तीन तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ेगा। अगर भारत के हिसाब से देखे तो युद्ध के कारण महंगाई बढ़ेगी, लेकिन इस जंग से कुछ फायदे भी होंगे।

इजरायल युद्ध से फायदे
ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल में कई वैश्विक टेक कंपनियों के दफ्तर हैं। अगर युद्ध लंबा चला तो इन कंपनियों का परिचालन प्रभावित होगा। ऐसे में कंपनियां इजरायल से अपना कारोबार समेटकर भारत या अन्य देशों में शिफ्ट कर सकती हैं। इजरायल में 500 से ज्यादा मल्टीनेशनल कंपनियों के दफ्तर है। युद्ध की स्थिति में इन कंपनियों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थाई तौर पर इजरायल में कामकाज बंद कर रखा है। अगर युद्ध लंबे समय तक चला तो ये कंपनियां इजरायल से अपना कारोबार समेटकर कहीं और शिफ्ट कर सकती है। ईटी की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि इजरायल में अपना दफ्तर चला रही कंपनियां अपना कारोबार किसी ऐसी जगहों पर शिफ्ट कर सकती हैं, जिनका टाइम जोन इजरायल से मैच करता हो। ऐसे में भारत और पश्चिम एशियाई देश उनके लिए विकल्प बन सकते है। जिस तरह से बीते कुछ सालों से भारत विदेशी कंपनियों की पहली पसंद बनकर उभरा है, इसका फायदा उसे यहां भी मिल सकता है।

फार्मा कंपनियों को फायदा
इजरायल हमास युद्ध से भारत की फार्मा कंपनियों के लिए नए मौके खुल सकते हैं। युद्ध और तनाव के चलते पश्चिम एशिया के कई देशों के दवा उद्योगों के सामने संकट है। यूएई, बहरीन, ओमान, कतर जैसे देश आयात पर निर्भर है। युद्ध के कारण इस देशों का करीब 1 बिलियन डॉलर का दवा व्यापार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में ये देश भारत की फार्मा इंडस्ट्री का मुंह ताक सकती है। उनके लिए ये मौका हो सकता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि इस युद्ध का भारत पर असर नहीं पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमत में तेजी से देश में महंगाई बढ़ सकती है। आयात-निर्यात प्रभावित हो सकता है ।

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