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चीन में एक और रियल एस्टेट कंपनी हुई डिफॉल्टर, पूरी इकॉनमी के डूबने का खतरा

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नई दिल्ली

चीन का रियल एस्टेट संकट गहराता जा रहा है। खबरों के मुताबिक देश की सबसे बड़ी प्राइवेट प्रॉपर्टी डेवलपर कंपनी कंट्री गार्डन ने भी विदेशी कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट किया है। इस कंपनी पर 11 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज और छह अरब डॉलर का घरेलू कर्ज है। इस डिफॉल्ट से चीन की मुश्किलें बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि चीन की इकॉनमी में रियल एस्टेट की करीब एक तिहाई हिस्सेदारी है। रियल एस्टेट कंपनियों के डूबने से बैंकों की हालत भी खस्ता हो सकती है और इससे पूरी इकॉनमी के डूबने का खतरा पैदा हो सकता है। जुलाई से सितंबर के दौरान चीन की इकॉनमी की ग्रोथ 4.9 परसेंट रही जो दूसरी तिमाही के 6.3% से कम है।

चीन की सरकार ने हाउसिंग डिमांड को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं लेकिन मकानों की बिक्री पिछले साल की तुलना में काफी कम है। साल के पहले नौ महीनों में देश में प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट में 9.1 परसेंट की गिरावट आई है। अगस्त में कंट्री गार्डन ने साल की पहली छमाही के आंकड़े जारी किए थे। इस दौरान कंपनी को रेकॉर्ड 6.7 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। अगर कंपनी के डिफॉल्ट करने की पुष्टि होती है तो विदेशी कर्जदार रिस्ट्रक्चरिंग प्रोसेस के लिए फाइनेंशियल एडवाइजर्स से बातचीत शुरू कर सकते हैं। कंपनी पर कर्ज को देखते हुए इस प्रोसेस में लंबा समय लग सकता है।

कैसे हुई संकट की शुरुआत
2021 में कंट्री गार्डन की प्रतिद्वंद्वी कंपनी एवरग्रैंड ने डिफॉल्ट किया था। इससे चीन में रियल एस्टेट संकट की शुरुआत हुई थी। कंपनी का चेयरमैन अभी पुलिस हिरासत में है। चीन की सरकार ने 2020 में रियल एस्टेट कंपनियों के कर्ज लेने की सीमा को लेकर नियम बनाए थे। इससे रियल एस्टेट इंडस्ट्री पूरी तरह हिल गई थी। किसी जमाने में एवरग्रैंड चीन की टॉप सेलिंग डेवलपर कंपनी थी। आज इस पर 300 अरब डॉलर से अधिक कर्ज है जो दुनिया में किसी भी रियल एस्टेट कंपनी पर सबसे अधिक कर्ज है। देश की कई रियल एस्टेट कंपनियों ने कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट किया है। इससे देश में कई प्रोजेक्ट लटके पड़े हैं।

रियल एस्टेट के साथ ही चीन की इकॉनमी कई अन्य मोर्चों पर भी संघर्ष कर रही है। देश की इकॉनमी की ग्रोथ सुस्त पड़ गई है, लोकल गवर्नमेंट का कर्ज बढ़ता जा रहा है और बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। मंदी की आशंका के कारण लोग खर्च करने से बच रहे हैं जिस कारण उपभोक्ता खपत भी सुस्त पड़ी है। विदेशी कंपनियां चीन से बोरिया-बिस्तर समेट रही हैं जबकि विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं। रही-सही कसर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव ने पूरी कर दी है।

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