नई दिल्ली
चीन की खस्ताहाल इकॉनमी का हाल किसी से छिपा नहीं है। चीन का रियल एस्टेट सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है। रियल एस्टेट कंपनियां दिवालिया हो रही है। जनसंख्या बूढ़ी हो रही है, जिसके कारण वर्कफोर्स प्रभावित हो रहा है। चीन में वर्कफोर्स की कमी के चलते विदेशी कंपनियां वहां से अपना कारोबार समेटने लगी है। चीन का आयात-निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। जो चीन अब तक दुनिया की फैक्ट्री का तमगा लेकर धौंस दिखाता रहा है, अब उसे झटके लग रहे हैं। ताजा झटका उसे आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल (Apple) ने दिया है।
चीन को झटका, भारत को तोहफा
ऐपल ने चीन को झटका देते हुए भारत को तोहफा दिया है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐपल ने चीन में अपना प्रोडक्शन कम कर भारत में बढ़ाने का ऐलान किया है। ऐपल ने घोषणा कि है कि आईफोन 17 की मैन्युफैक्चरिंग भारत में होगी। ऐपल एनालिस्ट Ming Chi Kuo की रिपोर्ट के मुताबिक iPhone 17 की मैन्युफैक्चरिंग भारत में होगी और साल 2025 में लॉन्च किया जाएगा। यह पहली बार होगा, जब ऐपल नए आईफोन का डेवलपमेंट चीन के बाहर करेगा। ऐपल अब चीन के बजाए अब भारत में अपना प्रोडक्शन बढ़ाने पर फोकस कर रहा है।
भारत का रूख, चीन की बढ़ रही बेचैनी
अमेरिका ने पंगा लेकर चीन को अमेरिकी कंपनियों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। अमेरिका कंपनियां चीन से अपना बोरिया बिस्तर समेटने लगी है। वहीं चीन ने सरकारी अधिकारियों के आईफोन के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दिया, जिसने ऐपल को मौका दे दिया चीन से बाहर निकलने का। भारत में स्मार्टफोन मार्केट का विस्तार हो रहा है। इसी साल ऐपल ने भारत में अपने दो स्टोर भी ओपन किए, जहां उन्हें बेहतरीन रिस्पांस देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से आईफोन शिपमेंट साल 2023 में लगभग 12-14% होगा, वहीं साल 2024 में आईफोन प्रोडक्शन 20-25% तक होने की उम्मीद है।
चीन ने अपने पैर पर खुद मारी कुल्हाड़ी
भारत में ऐपल आईफोन 17 के मैन्युफैक्चरिंग से चीन को बड़ा झटका लगा है। चीन में आईफोन प्रोडक्शन कम होने से फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों की मुश्किल बढ़ सकती है। चीन में बेरोजगारी और बढ़ सकती है। चीन की इकॉनमी पहले से हिली हुई है, वहीं ऐपल ने इस फैसले से उसे और झटका लगेगा। वहीं दूसरी ओर भारत में आईफोन प्रोडक्शन तेज रफ्तार से भाग रहा है। हाल ही में टाटा ने आईफोन असेंबलिंग प्लांट विस्ट्रॉन का अधिग्रहण किया है। जिसके बाद जल्द ही लोगों के हाथों में मेड इन इंडिया वाले आईफोन होंगे। वहीं भारत में स्किल्ड और सस्ती लेबर विदेशी कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित कर रही है। चीन को अभी और झटके लगने बाकी हैं। चीन और अमेरिका के रिश्तों का असर अब कारोबार पर दिखने लगा है। ऐपल चीन पर अपनी डिपेंडेंसी को कम कर भारत में प्रोडक्शन बढ़ा रहा है।
