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चीन की खस्ता हालत से विदेशी निवेशकों में भगदड़, 188 अरब डॉलर लेकर हुए फुर्र, भारत की चांदी

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नई दिल्ली

चीन के आर्थिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। ऐसे में विदेशी निवेशकों ने भी देश से किनारा करना शुरू कर दिया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के शेयरों और डेट में विदेशी होल्डिंग्स में दिसंबर 2021 के मुकाबले 188 अरब डॉलर यानी 17 परसेंट गिरावट आई है। यह आंकड़ा इस साल जून तक का है। उसके बाद से विदेशी निवेशकों ने चीन के मार्केट से काफी पैसा निकाला है। केवल अगस्त की ही बात करें तो बीते महीने चीन के बाजार से रेकॉर्ड 12 अरब डॉलर निकाले गए हैं। हाल के महीनों में चीन के आर्थिक मोर्चे पर कई बड़े झटके लगे हैं। देश का एक्सपोर्ट लगातार गिर रहा है, बेरोजगारी चरम पर है, लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत करने में लगे हैं, रियल एस्टेट गहरे संकट में है और पश्चिमी देशों के साथ चीन का तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में चीन की इकॉनमी पर विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार कम हो रहा है।

हॉन्ग कॉन्ग स्टॉक मार्केट में फॉरेन फंड की भागीदारी 2020 की तुलना में एक तिहाई से भी कम रह गई है। चीन की इकॉनमी में रियल एस्टेट का अच्छा-खासा हिस्सा है लेकिन पिछले समय से इस सेक्टर का संकट गहराता जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यह पूरी इकॉनमी को अपनी चपेट में ले सकता है। साथ ही चीन में कंज्यूमर स्पेंडिंग में भी भारी गिरावट आई है। इन कारणों से विदेशी निवेशक चीन से किनारा कर रहे हैं। इस साल एमएससीआई चाइना इंडेक्स में सात परसेंट गिरावट आई है। यही वजह है कि निवेशक चीन से अपना पैसा निकालकर भारत और लेटिन अमेरिका के देशों में लगा रहे हैं।

समस्या की जड़
जानकारों का कहना है कि चीन के साथ कई तरह की समस्याएं हैं। चीन के डेट मार्केट से ग्लोबल इनवेस्टर्स ने इस साल 26 अरब डॉलर निकाले हैं। युआन पर बिकवाली का इतना दबाव है कि चीन की करेंसी डॉलर के मुकाबले 16 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। पूरी दुनिया में जहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है वहीं चीन के सेंट्रल बैंक ने इसमें कटौती की है। इससे युआन और कमजोर हुआ है और विदेशी निवेशकों को चीन छोड़ने का एक और बहाना मिल गया है। ग्लोबल बैंकों को आशंका है कि इस साल चीन की इकॉनमी पांच परसेंट के ग्रोथ को हासिल नहीं कर पाएगी।

चीन में प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट में अगस्त में पिछले साल की तुलना में करीब 20 परसेंट गिरावट आई है। देश में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज में गिरावट साफ तौर पर देखी जा सकती है। फ्लैट्स की कीमतों में गिरावट के कारण नए अपार्टमेंट बनाने का सिलसिला रुक गया है। दो साल पहले की तुलना में मकानों की कीमत में 14 परसेंट गिरावट आई है। रियल एस्टेट कंपनियां कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट कर रही हैं जिससे बैंकों की भी हालत खराब है। अब आशंका है कि यह सेक्टर पूरी इकॉनमी को तबाह कर सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन की जीडीपी में कंस्ट्रक्शन और रिलेटेड एक्टिविटीज की करीब 25 परसेंट हिस्सेदारी है।

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